केदारनाथ VIP खर्च विवाद: प्रशासनिक जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि, BKTC के तीन अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश
केदारनाथ VIP खर्च विवाद: प्रशासनिक जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि
देहरादून। केदारनाथ धाम में वीआईपी मेहमानों के लिए आवास, भोजन और अन्य आतिथ्य सेवाओं पर मंदिर समिति के कोष से किए गए खर्चों के विवाद में अब एक नया प्रशासनिक मोड़ सामने आया है। उत्तराखंड शासन की जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता की स्पष्ट पुष्टि होने के बाद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के तीन तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में निर्देश जारी किए गए हैं। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika
विवाद की पृष्ठभूमि
इस मामला ने मई 2026 में एक आरटीआई के माध्यम से खुलासा किया था, जिसने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी। रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धालुओं के दान से संचालित मंदिर समिति के कोष से कई वीआईपी मेहमानों के आवास और भोजन का खर्च उठाया गया। विवाद के बढ़ने पर, जिन नेताओं और जनप्रतिनिधियों के नाम सामने आए, उन्होंने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने अपने ठहरने और यात्रा का खर्च स्वयं उठाया था। इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की गई है। कम शब्दों में कहें तो, पूरी स्थिति अब प्रशासन की जाँच के सहारे स्पष्ट हो रही है।
जांच का निष्कर्ष
25 जून 2026 को पर्यटन एवं धर्मस्व अनुभाग-1 के उप सचिव अनिल कुमार पाण्डेय ने गोपनीय पत्र के माध्यम से जानकारी दी कि मुख्य कार्याधिकारी BKTC द्वारा भेजी गई जांच आख्या का परीक्षण किया गया। जाँच में यह पाया गया कि मंदिर के कोष से अग्रिम धनराशि बिना किसी सक्षम स्तर की स्वीकृति के जारी की गई, जिससे इसे वित्तीय अनियमितता के रूप में देखा गया।
संदिग्ध अधिकारियों की पहचान
जांच के दौरान जिन अधिकारियों/कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी गई, उनमें शामिल हैं:
- तत्कालीन व्यवस्थापक, केदारनाथ
- तत्कालीन मुख्य प्रभारी अधिकारी, केदारनाथ
- तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 और संबंधित नियमावलियों के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाए।
आरटीआई के माध्यम से उजागर हुआ विवाद
यह पूरा मामला आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश नेगी द्वारा प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर सामने आया। दस्तावेजों में यह आरोप लगाया गया था कि कुछ वीआईपी व्यक्तियों के आवास और भोजन का खर्च मंदिर समिति ने वहन किया। चर्चा में जिन प्रमुख नामों का उल्लेख किया गया, उनमें भाजपा नेता नेहा जोशी, केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल और तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी के निजी सहायक शामिल थे।
हालांकि, नेहा जोशी और आशा नौटियाल ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने अपने ठहरने का भुगतान स्वयं किया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उनके नाम पर खर्च कैसे दर्शाया गया। उन दोनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया।
आगे की कार्रवाई
शासन के निर्देशों के बाद अब सभी की निगाहें BKTC पर हैं कि वह जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई करता है। यह मामला इसलिए जबरदस्त महत्व रखता है क्योंकि यह मंदिरों में श्रद्धालुओं के दान के उपयोग, वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न उठाता है। यदि शासन के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होती है, तो यह केदारनाथ VIP खर्च प्रकरण में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जाएगी।
इस जटिल मामले पर नजर रखी जा रही है, और इसके परिणाम को ध्यान में रखते हुए स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं के साथ-साथ রাজনৈতিক हलकों में भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
इस प्रकार, राज्य सरकार द्वारा की गई इस जांच से एक बार फिर यह साबित होता है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय जिम्मेदारी सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है। इसके माध्यम से ही विश्वास और जवाबदेही की एक संस्कृति का आधार तैयार हो सकता है।
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— प्रिया शर्मा, Team Amrita Bazaar Patrika
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