केदारनाथ धाम में श्रद्धालु की हार्ट अटैक से हुई दुखद मौत, प्रशासन पर उठे सवाल
केदारनाथ धाम में श्रद्धालु की हार्ट अटैक से हुई दुखद मौत
कम शब्दों में कहें तो, गुजरात के एक श्रद्धालु की केदारनाथ धाम में हार्ट अटैक से मौत हो गई, जिसका शव दो घंटे तक हेलीपैड पर पड़ा रहा। परिजनों ने समय पर इलाज न मिलने का आरोप लगाया है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika
रुद्रप्रयाग। चारधाम यात्रा के शुरू होते ही केदारनाथ धाम में एक श्रद्धालु की हार्ट अटैक से मौत ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की दिशा में गंभीर सवाल उठाए हैं। गुजरात के बड़ौदा निवासी टूर आपरेटर अंकुर कुमार अपने परिवार के साथ केदारनाथ के दर्शन करने पहुंचे थे। उनके पिता को अचानक हार्ट संबंधी समस्या हुई, और उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाई।
जानकारी के अनुसार, 100 नंबर पर फोन करने के बावजूद डेढ़ घंटे तक कोई मदद नहीं पहुंची। अंततः अंकुर को अपने पिता को पीठ पर लाद कर नीचे ले जाना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह घटना तब हुई जब केदारनाथ धाम के कपाट खोले गए थे और यात्रियों की भीड़ बढ़ने लगी थी।
बेटे द्वारा प्रशासन पर आरोप
मृतक के बेटे अंकुर ने प्रशासन पर लापरवाही और संवेदनहीनता के गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि उनके पिता का शव दो घंटे तक धूप में हेलीपैड पर पड़ा रहा, जबकि प्रशासन ने इसमें कोई मदद नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध थे, तो मृत श्रद्धालु के शव को सम्मानपूर्वक नीचे ले जाने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
प्रशासन की सफाई
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने इस मामले में सफाई दी है। उनका कहना है कि उन्हें कंट्रोल रूम से हेलीपैड पर शव होने की जानकारी नहीं थी। बंशीधर तिवारी जब दोपहर में इस बात की जानकारी मिली, तब उन्होंने शव को नीचे लाने की व्यवस्था करने का आदेश दिया।
परिजनों की समस्या
अंकुर कुमार ने बताया कि जब उन्होंने रुद्रप्रयाग प्रशासन से मदद मांगी, तो उन्हें मात्र एंबुलेंस का नंबर दिया गया। उनके अनुसार, एंबुलेंस के संचालक ने शव को दिल्ली एयरपोर्ट ले जाने के लिए 16 हजार रुपये की मांग की। यह घटना इस बात का संकेत है कि यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रबंधन की आवश्यकता है।
व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस घटना के बाद चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं पर फिर से सवाल उठने लगे हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आस्था के साथ उत्तराखंड पहुंचते हैं, ऐसे में आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को सुधारना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। पूर्व में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
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समापन
कुल मिलाकर, यह दुखद घटना साफ दर्शाती है कि यात्रियों की सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर प्रशासन को अधिक सजग रहने की आवश्यकता है। जब श्रद्धालु ऐसे कठिन समय में उचित चिकित्सा सहायता नहीं पा रहे हैं, तो यह एक बड़ा सोचने का मुद्दा बन जाता है। हर साल लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
सभी श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति सजग रहना चाहिए। यूपीएससी विभाग सहित स्थानीय प्रशासन को इस मामले में गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।
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— टीम अमृता बाजार पत्रिका, साक्षी राव
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