कैंसर पीड़ितों के लिए जिला प्रशासन का मानवीय प्रयास - नए जीवन की खोज
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून स्थित जिला प्रशासन ने एक कैंसर पीड़िता और उसके बच्चों की शिक्षा और इलाज में मदद देने के लिए आगे आकर एक नई मिसाल पेश की है।
देहरादून। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और जिलाधिकारी सविन बंसल की कुशल नेतृत्व में जिला प्रशासन ने जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए साहसिक कदम उठाए हैं। इस बार, प्रशासन ने डोईवाला निवासी कैंसर पीड़िता सुनीता कलवार के लिए एक फरिश्ता की भूमिका निभाई। सुनीता ने अपने पति के निधन के बाद गंभीर बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझते हुए अपनी और अपने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य की विषय में मदद की गुहार लगाई थी।
बच्चों की शिक्षा और इलाज को मिला सहारा
सुनीता कलवार ने जिलाधिकारी से मुलाकात करके बताया कि उनके पति का निधन होने के बाद वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो गई थी कि बच्चों की पढ़ाई और इलाज दोनों जारी रखना मुश्किल हो रहा था। सुनीता ने बच्चों की शिक्षा को जारी रखने के लिए फीस में छूट और आर्थिक सहायता की मांग की। प्रशासन ने उनकी परेशानियों को गंभीरता से लिया और तुरंत सहायता के निर्देश दिए।
रायफल क्लब फंड से 50 हजार की आर्थिक मदद
जिलाधिकारी सविन बंसल ने त्वरित निर्णय लेते हुए रायफल क्लब फंड से सुनीता कलवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। इस आर्थिक मदद से न केवल उनके बेटे का स्कूल में दाखिला कराया गया, बल्कि उनकी बेटी की रुकी हुई पढ़ाई को जिले की महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के माध्यम से फिर से शुरू करने का मार्ग प्रशस्त किया गया। इस पहल ने दोनों बच्चों के भविष्य को एक नई दिशा दी है।
चिकित्सा सहायता के साथ भरोसा और सहारा
सुनीता का कैंसर का ऑपरेशन 11 जुलाई 2024 को जौलीग्रांट स्थित अस्पताल में हुआ था, और वर्तमान में उनका उपचार जारी है। इलाज के दौरान चल रहे आर्थिक और सामाजिक संकट के बीच, जिला प्रशासन ने न केवल आर्थिक मदद प्रदान की, बल्कि मानवीय सहयोग और भरोसा भी दिया। यह दिखाता है कि प्रशासन केवल जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह मानवता के नाते आगे आकर लोगों की सहायता करता है।
जिला प्रशासन का संवेदनशील कार्यशैली
जिला प्रशासन ने पिछले वर्षों में कई जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता, चिकित्सा सहयोग और विभिन्न प्रकार की राहत प्रदान की है। ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के तहत, सैकड़ों जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित करते हुए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इस प्रकार की पहलें जनकल्याणकारी कार्यशैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन रही हैं।
इस मामले में जिला प्रशासन की सक्रियता और संवेदनशीलता ने दिखाया है कि समाज में जब कोई व्यक्ति संकट में होता है, तो सरकार और प्रशासन का कर्तव्य बनता है कि वह उनकी सहायता करे। ऐसे ही प्रयासों से समाज में नई उम्मीदों का संचार होता है।
इस कहानी से प्रेरित होकर हमें भी अपने आसपास के लोगो की मदद के लिए आगे आना चाहिए और समाज में संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए।
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सादर,
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