गेंवाली ग्राम वासियों का आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी, प्रशासन की चुप्पी बनी सवाल
गेंवाली ग्राम वासियों का आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी
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कम शब्दों में कहें तो ग्राम पंचायत गेंवाली के निवासियों का आमरण अनशन आज तीसरे दिन में प्रवेश कर गया है। पूर्व प्रधान बचन सिंह रावत एवं समाजसेवी कार्यकर्ताओं ने इस अनशन की शुरुआत 20 फरवरी को की थी, और इसका उद्देश्य 7 सूत्रीय मांगों को प्रभावी ढंग से उठाना है। यह भूख हड़ताल अब तब तक जारी रहेगी जबतक प्रशासन की ओर से कोई ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलता।
अनशन की पृष्ठभूमि
टिहरी गढ़वाल में भिलंगना विकास खंड स्थित ग्राम पंचायत गेंवाली में 22 फरवरी 2026 को ग्रामवासियों ने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया। यह अनशन ग्राम पंचायत के पास सोमेश्वर देवता मंदिर के निकट शुरू हुआ। 20 फरवरी को सायं 3 बजे से प्रारंभ हुआ यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि जिला प्रशासन की ओर से उनकी 7 सूत्रीय मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। अनशनकारियों के स्वास्थ्य में गिरावट आ रही है, लेकिन ग्रामवासी इन कठिनाइयों के बावजूद अपने संकल्प में दृढ़ हैं।
मुख्य मांगें
अनशनकारियों की प्रमुख 7 सूत्रीय मांगें इस प्रकार हैं:
- दैविक आपदा प्रभावित 43 परिवारों का भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर गेंवाली में पुनर्वास किया जाए।
- राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गेंवाली के छतिग्रस्त भवन का नवीन निर्माण किया जाए।
- अधूरा 30 मीटर स्टील गार्डन सेतु पूर्ण कराया जाए।
- 2015 से लंबित बीएसएनएल टावर का निर्माण किया जाए।
- विनयखाल-गेंवाली मोटर मार्ग के क्षतिग्रस्त हिस्सों का मरम्मत किया जाए।
- 28 अगस्त 2025 की आपदा में 12 परिवारों को हुए कृषि भूमि क्षति के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
- क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों का त्वरित निर्माण सुनिश्चित किया जाए।
ग्रामवासियों की प्रतिक्रिया
ग्रामवासियों ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो अनशन में और भी लोग शामिल होंगे। वर्तमान में, स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं आया है, जो ग्रामवासियों के लिए चिंता का विषय है। इस मौन के पीछे क्या कारण हैं, यह जानना आवश्यक है। प्रशासन को सशक्त कदम उठाने की आवश्यकता है, नहीं तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।
संभावित नतीजे
इस अनशन का प्रभाव न केवल गेंवाली गाँव पर पड़ेगा, बल्कि इसकी गूंज पूरे क्षेत्र में सुनाई देगी। प्रशासन को अब स्थिति को गंभीरता से लेते हुए ग्रामवासियों की मांगों पर पहल करनी चाहिए। यदि समय पर समाधान नहीं निकाला गया, तो इससे एक नया आंदोलन भी जन्म ले सकता है। इसे देखते हुए यह आवश्यक है कि ज़िला अधिकारी एवं प्राधिकृत व्यक्ति ग्रामवासियों की आवाज सुनें और उनकी समस्या का समाधान करें।
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Team Amrita Bazaar Patrika
स्नेहा अग्रवाल
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