गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मुहिम को मिला नया समर्थन, विधायक बुटोला ने दिया साथ
गैरसैंण की स्थायी राजधानी की मांग को मिला नया बल
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को विधायक लखपत सिंह बुटोला का समर्थन मिला है।
देहरादून, 22 मार्च 2026। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर एकता विहार में चल रहा महा-अनशन रविवार को 15वें दिन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान आंदोलन को नया बल मिला जब पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान को विधायक लखपत सिंह बुटोला ने खुला समर्थन दिया।
अनशन का 15वां दिन
अनशन के 15वें दिन, पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी के अलावा जसपाल सिंह रावत और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश नेगी भी अनशन पर बैठे। इस अवसर पर पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी ने अपने विचार रखते हुए कहा, "जब शासन जनता की अपेक्षाओं के प्रति संवेदनशील नहीं रहता, तो समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट होकर आवाज उठानी पड़ती है।" उन्होंने गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने की मांग को राज्य के स्वाभिमान से जुड़ा विषय बताया।
विधायक बुटोला का समर्थन
विधायक लखपत सिंह बुटोला ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि गैरसैंण की राजधानी बनाने की मांग केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे राज्य की भावनाओं से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने यह भी कहा कि इस दिशा में सरकार को गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। यह स्पष्ट है कि यह आंदोलन केवल एक स्थान के लिए नहीं, बल्कि समस्त राज्य के लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
आंदोलन की मजबूती
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और समर्थक मौजूद रहे, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को दोहराया। यह आंदोलन लगातार बढ़ता जा रहा है और स्थानीय लोगों में इसकी जागरूकता भी स्पष्ट नजर आ रही है।
गौरतलब है कि गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। समय-समय पर इस मुद्दे पर विभिन्न संगठनों द्वारा आंदोलन किए जाते रहे हैं। अब जब आंदोलन को विधायक का समर्थन मिल गया है, तो यह उम्मीद की जा सकती है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी।
उम्मीद की जा रही है कि इस समर्थन से आंदोलन को और अधिक मजबूती मिलेगी, जिससे राज्य की राजनीतिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह न केवल स्थानीय लोगों की बल्कि पूरे उत्तराखंड की स्वाभिमान की बात है।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका, सुमन राठी
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