गैरसैंण बजट सत्र: कांग्रेस और यूकेडी के बीच गरमाते हालात
गैरसैंण बजट सत्र: कांग्रेस और यूकेडी के बीच गरमाते हालात
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कम शब्दों में कहें तो, गैरसैंण में बजट सत्र के आरंभ से ही राजनीतिक प्रदर्शनों और तीखी नोकझोंक का माहौल बना हुआ है। कांग्रेस और यूकेडी ने सरकार पर कई आरोप लगाए हैं और विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन किया है।
सत्र का गर्म माहौल
गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में सोमवार से शुरू हुए बजट सत्र में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलते दिख रहे हैं। विधानसभा का यह सत्र राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू हुआ, लेकिन इस दौरान कांग्रेस की ओर से विरोध प्रदर्शन ने ध्यान खींचा। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि सत्र की अवधि अनावश्यक रूप से कम कर दी गई है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
सदन के बाहर यूकेडी कार्यकर्ताओं ने भी विधानसभा घेरने की कोशिश की। इन प्रदर्शनों में शामिल कार्यकर्ताओं ने दमदार नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में प्रीतम सिंह, भुवन कापड़ी, हरीश धामी और मनोज तिवारी जैसे नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने कहा कि सरकार ने बजट सत्र को पहले से तय कर लिया, जिससे विपक्ष को अपनी बातें रखने का उचित अवसर नहीं मिला।
मुख्य मुद्दे
कांग्रेस और यूकेडी ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया है, जिनमें महंगाई, बेरोजगारी, पलायन और विकास कार्यों का समावेश है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार इन मसलों पर चर्चा करने में टालमटोल कर रही है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि वे सदन में इन मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे और जरूरत पड़ने पर प्रदर्शन भी करेंगे।
यूकेडी का विरोध प्रदर्शन
यूकेडी कार्यकर्ता, जिनकी संख्या बड़ी थी, ने दिवालीखाल में प्रदर्शन किया और स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता पुलिस को चकमा देकर आगे बढ़ने में सफल रहे, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस कार्रवाई में 10 से 15 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पानी की बौछार का प्रयोग किया।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
- बजट सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग
- महंगाई, बेरोजगारी और पलायन पर विस्तृत चर्चा
- राज्यपाल के प्रोटोकॉल के पालन का सवाल
- प्रश्नकाल में अधिक समय देने की मांग
सत्र की अवधि पर विवाद
बजट सत्र की अवधि को लेकर यह राजनीतिक विवाद हाल ही में बढ़ा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यदि सत्र की अवधि लंबी होती तो जरूरी मुद्दों पर व्यापक चर्चा संभव होती। हालांकि, सरकार ने अपने तय एजेंडे के अनुसार सभी जरूरी विषयों पर चर्चा होने का आश्वासन दिया है।
निष्कर्ष
गैरसैंण में बजट सत्र का यह शुरुआत ही दिखाती है कि आगे और भी राजनीतिक गतिविधियाँ देखने को मिलेंगी। कांग्रेस और यूकेडी के प्रदर्शनों से साफ जाहिर होता है कि प्रदेश की राजनीति में गर्मी बनी रहेगी। इन मुद्दों पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि ये न केवल विधानसभा के भीतर, बल्कि बाहर भी लोगों को प्रभावित करेंगे।
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टीम अमृता बाजार पत्रिका
निर्मला कौर
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