गैरसैंण बजट सत्र में पेश होगी तीन वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट, पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल

Feb 28, 2026 - 21:44
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गैरसैंण बजट सत्र में पेश होगी तीन वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट, पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल
गैरसैंण बजट सत्र में पेश होगी तीन वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट, पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल

गैरसैंण बजट सत्र में पेश होगी तीन वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट, पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल

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कम शब्दों में कहें तो, गैरसैंण में प्रस्तावित बजट सत्र में तीन वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट पेश की जा सकती है, जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है।

राज्य की लंबित वार्षिक ऑडिट रिपोर्टों की स्थिति को लेकर हाल ही में हलचल तेज हो गई है। निदेशक ऑडिट ने वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के लिए ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजा है। इस रिपोर्ट के सदन में प्रस्तुत न होने को गंभीर विषय माना जा रहा है। विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, आरटीआई कार्यकर्ता रमेश चंद्र पांडे ने इस मुद्दे को उजागर किया है।

आरटीआई से हुआ खुलासा

आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी के बाद, अब उम्मीद की जा रही है कि 9 मार्च से गैरसैंण में प्रस्तावित बजट सत्र के दौरान ये रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखी जा सकती है। इसकी तैयारी के लिए निदेशक ने 20 दिसंबर 2025 को रिपोर्ट को संयुक्त सचिव (वित्त, ऑडिट प्रकोष्ठ) को भेजा था। इसके पश्चात शासन स्तर से कुछ आपत्तियों के साथ इसे वापस किया गया, जिन्हें निदेशक आलोक कुमार पांडे ने 24 फरवरी को संशोधित कर पुनः प्रशासन को भेज दिया।

कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन

उत्तराखंड लेखा परीक्षा अधिनियम 2012 की धारा 8(3) में उल्लेख है कि निदेशक ऑडिट प्रत्येक वर्ष ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर उसे विधानसभा में पेश करने के लिए राज्य सरकार को भेजेगा। किंतु पिछले वर्षों में यह प्रक्रिया नियमित रूप से पालन नहीं की गई, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।

जवाबदेही पर उठे सवाल

रमेश चंद्र पांडे ने बताया कि 'इस प्रकार की देरी को समझा नहीं जा सकता। कानून के स्पष्ट प्रावधान हैं, फिर भी रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत नहीं की गई।' उन्होंने मांग की कि इस देरी के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनके अनुसार, 2014-15 से 2021-22 तक की रिपोर्टें भी जनदबाव के बाद एक साथ सदन में रखी गई थीं।

पांडे ने आगे कहा कि ‘अगर समय पर ऑडिट रिपोर्टें पेश की जातीं, तो वित्तीय अनियमितताओं, गबन और प्रक्रियागत त्रुटियों पर प्रभावी चर्चा संभव होती।’ इससे न केवल सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' की वास्तविक परीक्षा होती, बल्कि भविष्य में सुधारात्मक कदम उठाने की भी आवश्यकता होती।

आगे का रास्ता

सरकार के लिए यह समय महत्वपूर्ण है। यदि बजट सत्र में ये रिपोर्टें पेश होती हैं, तो यह एक नई शुरुआत हो सकती है। इससे न सिर्फ प्रतिवर्ष की अनियमितताओं का पता चलेगा, बल्कि प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रमाण भी मिलेगा।

इस विषय पर उचित नीतियों और कड़े कदमों की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। लोगों की उम्मीद है कि सरकार इस कड़े समय में उचित नीतियों के साथ आगे बढ़ेगी।

सभी नागरिकों को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पारदर्शिता और जवाबदेही का पालन किया जाए। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर आइए।

हमेशा की तरह, हम इस मुद्दे पर आपके विचार सुनने के लिए तैयार हैं। कृपया अपने विचार साझा करें।

टीम अमृता बाजार पत्रिका

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