जौलकांडे: बर्ड वॉचिंग का नया हब, युवाओं के लिए रोजगार के सुनहरे अवसर
जौलकांडे: बर्ड वॉचिंग का नया हब, युवाओं के लिए रोजगार के सुनहरे अवसर
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कम शब्दों में कहें तो, बागेश्वर जनपद का जौलकांडे अब बर्ड वॉचिंग के उभरते केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।
बागेश्वर, 28 मार्च 2026 – उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद में स्थित जौलकांडे गांव में एक अनूठा दो दिवसीय एडवांस बर्ड वॉचिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ स्थानीय मुख्य विकास अधिकारी, श्री आर.सी. तिवारी ने किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपेक्षा जताई कि उत्तराखंड की समृद्ध पक्षी विविधता इको-टूरिज्म की दिशा में नए अवसर उत्पन्न कर सकती है, जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी।
प्रशिक्षण का उद्देश्य और महत्व
इस कार्यक्रम में शामिल रहे सम्मानित अतिथियों में पूर्व प्रधान दरबान सिंह बिष्ट और ग्राम प्रधान संजीव कुमार भी शामिल थे। खास बात यह रही कि गांव की युवतियों ने भी इस प्रशिक्षण में बढ़-चढ़कर भाग लिया, जो महिला सशक्तिकरण का एक सकारात्मक संकेत है।
जिला पर्यटन विकास अधिकारी, पी.के. गौतम ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण गांव के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करते हैं और उन्हें प्रकृति से जोड़ते हैं। कार्यक्रम में 15 छात्रों और छात्राओं ने भाग लिया, जिन्हें बर्ड वॉचिंग की विभिन्न तकनीकें, पक्षियों की पहचान और उनके व्यवहार की जानकारी प्रदान की गई।
प्रशिक्षण का संचालन
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन समर्पित मीडिया सोसाइटी के प्रशिक्षकों, राजेश भट्ट और राजीव बिष्ट द्वारा किया गया। प्रशिक्षकों ने बर्ड वॉचिंग के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया, ताकि युवा इस क्षेत्र में दक्षता हासिल कर सकें।
जौलकांडे को बर्ड वॉचिंग डेस्टिनेशन में बदलना
जौलकांडे को बर्ड वॉचिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय युवा अब इस क्षेत्र में कैरियर बनाने का सपना देख सकते हैं, जिससे वे न केवल रोजगार प्राप्त करेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकेंगे। इस प्रशिक्षण के अंतर्गत, उन्हें बर्ड वॉचिंग की तकनीक और पक्षियों के परस्पर संबंधों की जानकारी दी जा रही है।
समुदाय की भागीदारी
गांव के लोगों की सक्रिय भागीदारी इस परियोजना की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। स्थानीय समुदाय का समर्थन इस योजना को पुष्ट करता है, जो इस क्षेत्र के इको-टूरिज्म को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।
अंतिम विचार
जिस प्रकार जौलकांडे गांव में बर्ड वॉचिंग का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, वह न केवल आज के युवाओं को नए रोजगार के अवसर देता है बल्कि क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को भी संरक्षित करने में मदद करता है। यह आयोजन एक सेतु की तरह कार्य करता है, जो समुदाय और प्रकृति दोनों के बीच एक सकारात्मक संबंध स्थापित करता है।
इस प्रकार के कार्यक्रमों की आवश्यकता को समझते हुए, सरकार और स्थानीय प्रशासन को ऐसे और कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए ताकि और भी युवा इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका, साक्षी शर्मा
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