जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर टैक्सी चालकों की शोषण का मुद्दा, केंद्रीय मंत्री से मदद की अपील
जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर टैक्सी चालकों की शोषण का मुद्दा, केंद्रीय मंत्री से मदद की अपील
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड टैक्सी मैक्सी महासंघ ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पार्किंग ठेकेदार द्वारा टैक्सी चालकों पर किए जा रहे अत्याचार और अत्यधिक शुल्क वसूली के खिलाफ आवाज उठाई है। महासंघ ने केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा को एक शिकायती पत्र भेजकर इसका त्वरित समाधान करने की अपील की है।
जौलीग्रांट एयरपोर्ट (देहरादून) पर पार्किंग के ठेकेदार द्वारा टैक्सी चालकों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के मुद्दे ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उत्तराखंड टैक्सी मैक्सी महासंघ का आरोप है कि पार्किंग शुल्क में भारी अंतर है। महासंघ के अध्यक्ष सुंदर सिंह पंवार के अनुसार, जहां निजी वाहनों से मात्र 30 रुपये का पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है, वहीं टैक्सी सेवाओं से 345 रुपये की भारी वसूली की जा रही है। यह वसूली पूरी तरह से अनुचित और असंगत है।
दुर्व्यवहार और पुलिस से धमकी
महासंघ द्वारा पेश की गई शिकायत में यह भी कहा गया है कि पार्किंग कंपनी के कर्मचारी नियमित रूप से टैक्सी चालकों के साथ गाली-गलौज और मारपीट कर रहे हैं। यदि ड्राइवर विरोध करते हैं, तो उनके खिलाफ झूठे पुलिस केस दर्ज कराए जाते हैं। इस स्थिति ने ना केवल चालकों में भय पैदा किया है, बल्कि इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के बीच उत्तराखंड की छवि भी धूमिल हो रही है।
सरकार की अनसुनी
महासंघ ने यह भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को पहले मुख्यमंत्री और सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के ध्यान में लाया था, लेकिन शासन के निर्देशों के बावजूद ठेकेदार का मनमाना रवैया जारी है। यदि इस स्थिति का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो प्रदेश के टैक्सी व्यवसायियों को मजबूरन सख्त कदम उठाने पड़ेगे।
— सुंदर सिंह पंवार, प्रदेश अध्यक्ष (उत्तराखंड टैक्सी मैक्सी महासंघ)
महासंघ की मांगे
महासंघ की मांग है कि पार्किंग शुल्क को तर्कसंगत बनाया जाए और ठेकेदार कंपनी की गुंडागर्दी पर कड़ी लगाम लगाने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएं। इस मुद्दे पर महासचिव अनमोल अग्रवाल सहित मसूरी, ऋषिकेश और हरिद्वार की यूनियनों ने भी अपना समर्थन व्यक्त किया है। उनके इस समर्थन से टैक्सी चालकों की इस लम्बी लड़ाई को और भी मजबूती मिलेगी।
अंत में, यह स्पष्ट है कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर चल रहे इस विवाद के न केवल टैक्सी चालकों पर प्रभाव हैं, बल्कि इससे पर्यटन उद्योग और उत्तराखंड की छवि भी प्रभावित हो रही है। महासंघ की आवाज़ को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
हालांकि, यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है, जो सभी पक्षों के लिए हानिकारक हो सकती है।
किसी भी अन्य अपडेट के लिए, हमारी वेबसाइट Amrita Bazaar Patrika पर जाएं।
टीम अमृता बाजार पत्रिका, सुनिता कुमारी
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0