टनकपुर-नांदेड़ एक्सप्रेस: श्रद्धालुओं का इंतज़ार जारी, धामी सरकार की रेल सेवा की कछुआ गति

Apr 19, 2026 - 00:44
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टनकपुर-नांदेड़ एक्सप्रेस: श्रद्धालुओं का इंतज़ार जारी, धामी सरकार की रेल सेवा की कछुआ गति
टनकपुर-नांदेड़ एक्सप्रेस: श्रद्धालुओं का इंतज़ार जारी, धामी सरकार की रेल सेवा की कछुआ गति

टनकपुर-नांदेड़ एक्सप्रेस: श्रद्धालुओं का इंतज़ार जारी, धामी सरकार की रेल सेवा की कछुआ गति

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कम शब्दों में कहें तो, टनकपुर से नांदेड़ के बीच सीधी रेल सेवा का वादा तीन महीने बाद भी अधूरा है।

टनकपुर-: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सिखों के पवित्र धाम तख्त श्री हज़ूर साहिब (नांदेड़ साहिब) के लिए टनकपुर से सीधी रेल सेवा शुरू करने की घोषणा तो की गई थी। लेकिन वास्तविकता यह है कि इस सेवा का इंतज़ार कर रहे श्रद्धालुओं को अब तक निराश होना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री धामी की पहल

मुख्यमंत्री धामी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस संबंध में मुलाकात की थी, जिसके परिणामस्वरूप इस रेल सेवा की घोषणा की गई। यह कदम सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा था।

ज़मीनी स्थिति

हालांकि, तीन महीने बीत जाने के बाद भी यह सेवा शुरू नहीं हो पाई है। शाही रेलवे स्टेशन पर खड़े रेल कोच, जो इस मार्ग पर चलने के लिए तैयार हैं, अब भी पटरी पर नहीं आ पाए हैं। इस देरी से श्रद्धालु भारी निराशा का सामना कर रहे हैं।

श्रद्धालुओं की समस्याएँ

श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके लिए यह रेल सेवा जीवन दायिनी है। यह केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक आस्था से जुड़ी है। ऐसे में, जब उनकी उम्मीदें बुरी तरह से धूमिल हो रही हैं, वो अपनी आवाज उठाने के लिए मजबूर हैं।

धामी सरकार की भूमिका

हालांकि धामी सरकार ने इस मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया है, लेकिन रेलवे की धीमी गति उनके प्रयासों को विफल कर रही है। स्थानीय नेताओं और श्रद्धालुओं ने इस पर चिंता व्यक्त की है और सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

अंत में

टनकपुर से नांदेड़ के बीच रेल सेवा का उद्घाटन, मुख्यमंत्री धामी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन ज़मीनी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होने के कारण यह कदम श्रद्धालुओं के लिए अल्पकालिक प्रतीत हो रहा है। धर्म और यात्रा के संदर्भ में यह विषय केवल स्थानीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी समर्पित ध्यान देने की आवश्यकता है।

यही वक्त है कि सरकार इस आशा को पूरा करने में कदम उठाए, ताकि श्रद्धालुओं का सपना सच हो सके।

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टीम अमिता बाज़ार पत्रिका

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