टनकपुर में खिचड़ी भोज का उल्लास, मुख्यमंत्री धामी ने साझा की संस्कृति का संदेश

Feb 8, 2026 - 00:44
 156  501.8k
टनकपुर में खिचड़ी भोज का उल्लास, मुख्यमंत्री धामी ने साझा की संस्कृति का संदेश
टनकपुर में खिचड़ी भोज का उल्लास, मुख्यमंत्री धामी ने साझा की संस्कृति का संदेश

टनकपुर में खिचड़ी भोज का उल्लास, मुख्यमंत्री धामी ने साझा की संस्कृति का संदेश

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika

कम शब्दों में कहें तो, टनकपुर में आयोजित माघ खिचड़ी भोज कार्यक्रम ने स्थानीय संस्कृति को समर्पित एक अद्वितीय उत्सव का रूप ले लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर खिचड़ी प्रसाद का सेवन किया और श्रद्धालुओं के साथ बैठकर पारंपरिक संस्कारों का अनुभव साझा किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने न केवल खिचड़ी भोज का मजा लिया, बल्कि ‘खड़ी होली’ जैसी परंपरा में भी शामिल हुए।

माघ खिचड़ी भोज का शुभारंभ

टनकपुर के शारदा घाट पर पारंपरिक माघ खिचड़ी भोज कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस मेले में मुख्यमंत्री धामी ने अपनी उपस्थिति से सभी का दिल जीत लिया। उन्होंने श्रद्धालुओं को खुद प्रसाद ग्रहण कराते हुए उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को प्रमुखता दी। इतना ही नहीं, उन्होंने आम नागरिकों के बीच बैठकर इस भोज का आनंद लिया, जो कि समाज के लिए एक मजबूत संदेश था।

खड़ी होली का रंग-बिरंगापन

कार्यक्रम का एक खास हिस्सा स्थानीय महिलाओं का ‘खड़ी होली’ समारोह था। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर समूह में खड़े होकर कुमाऊँ के लोकगीत गाए। मुख्यमंत्री धामी ने भी इस लोकगीत में स्वरों का समावेश किया। यह दृश्य न केवल मनमोहक था, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे उत्तराखंड की लोक परंपराएँ आज भी लोगों को एकत्रित करती हैं।

भक्ति और उल्लास का माहौल

इस उत्सव के दौरान, ढोल-दमाऊँ और लोक धुनों की मधुर लय ने संपूर्ण वातावरण को भक्ति और उल्लास से भर दिया। टनकपुर की गलियों में गूंजती ‘खड़ी होली’ ने कुमाऊँ की जीवंत और रंगीन लोक परंपराओं की शानदार तस्वीर प्रस्तुत की। इस मेल मिलाप ने सभी को एक अद्वितीय अनुभव दिया, जो लंबे समय तक याद रहेगा।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन के दौरान कहा, "माघ मास श्रद्धा, सादगी, संयम और समरसता का प्रतीक है। खिचड़ी भोज जैसी परंपराएँ हमें सामाजिक एकता में बांधती हैं और खड़ी होली जैसी लोक विधाएँ हमारी जड़ों और संस्कृति को और मजबूती प्रदान करती हैं।" उन्होंने नए पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने की भी बात कही।

इस प्रकार का कार्यक्रम न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखता है, बल्कि यह देश के विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के बीच समरसता को भी बढ़ाता है।

इस समय मुख्यमंत्री धामी के संदेश ने यह स्थापित किया कि इस तरह के पारंपरिक आयोजनों की आवश्यकता आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में भी बनी हुई है।

अधिक जानकारी और अपडेट्स के लिए, विजिट करें Amrita Bazaar Patrika.

सादर,

टीम अम Rita बाजार पत्रिका - अंजलि शर्मा

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0