टिहरी रामलीला का उत्सव, दर्शकों की आँखों में खुशी और भावनाओं का समुद्र
टिहरी रामलीला का भव्य आगाज़, राम-सीता जन्म मंचन से भावुक हुए दर्शक
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कम शब्दों में कहें तो, टिहरी गढ़वाल में बौराड़ी स्टेडियम में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला मंचन का पहला दिन अत्यधिक भावनात्मक और धार्मिक आस्था से भरा रहा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग शामिल हुए।
टिहरी गढ़वाल, 22 मई। बौराड़ी स्टेडियम में आयोजित रामलीला के प्रथम दिवस ने सभी दर्शकों को भक्ति, संस्कृति और धार्मिक आस्था का एक अद्भुत संगम देखने का अवसर दिया। इस समारोह का उद्घाटन टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय और नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि रामलीला न केवल हमें भारतीय संस्कृति की गहराई को समझाती है, बल्कि यह हमारी नई पीढ़ी को नैतिक मूल्यों की प्रेरणा भी देती है।
इस अवसर पर भाजपा नेत्री सुषमा उनियाल, भाजपा नेता जीतराम भट्ट, कांग्रेस नगर अध्यक्ष कुलदीप पंवार, नगरपालिका सभासद प्रीति पोखरियाल, जिला सूचना अधिकारी द्रवनिता शर्मा और जिला खाद्य और सुरक्षा आयुक्त प्रमोद रावत जैसे विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित रहे। इनके साथ-साथ स्थानीय लोग और श्रद्धालुओं की भी बड़ी भीड़ इस भव्य समारोह का हिस्सा बनी।
प्रमुख मंचन ने किया दर्शकों को मंत्रमुग्ध
पहले दिन भगवान राम और माता सीता के जन्म का प्रसंग बेहद भावुकता से प्रस्तुत किया गया। मंचन में रावण का घमंड, राजा दशरथ की चिंता और पुत्रेष्टि यज्ञ का प्रसंग भी शामिल किया गया, जिससे दर्शकों को गहराई से छू लिया। कलाकारों की जीवंत अभिनय शैली, सुंदर संवाद अदायगी, और धार्मिक भजन एवं संगीत ने कार्यक्रम में भावनाओं का संचार कर दिया।
रामलीला के दौरान मंच सज्जा, पारंपरिक वेशभूषा और प्रकाश व्यवस्था भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही। कलाकारों की प्रस्तुति को देखकर उपस्थित दर्शकों ने खड़े होकर उनकी सराहना की। रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आज के दूसरे दिन भी रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया जाएगा, जो कि दर्शकों को और भी भावुक कर देगा।
संस्कृति का अद्भुत उत्सव
रामलीला न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक भी है। इस तरह के आयोजनों से न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलता है, बल्कि विभिन्न वर्गों के लोगों को एक मंच पर लाने का कार्य भी होता है। इससे नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के आदर्शों और मूल्यों को समझने का मौका मिलता है।
रामलीला के इस आयोजन में स्थानीय समुदाय के लोगों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। यह उनके लिए एक मौका था कि वे अपने सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रख सकें और उसे आगे बढ़ा सकें। आयोजकों का मानना है कि ऐसे समारोह आने वाली पीढ़ियों में हमारी समृद्ध संस्कृति को जीवित बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएँगे।
समापन टिप्पणियाँ
इसके बाद भी, टिहरी रामलीला का यह कार्यक्रम सम्पूर्ण राज्य में धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। रामलीला की इस परंपरा को और आगे बढ़ाने के लिए सभी समुदायों से सहयोग की अपेक्षा है।
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टीम अमृता बाजार पत्रिका - साक्षी शर्मा
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