दिल्ली में दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति का विरोध तेज, कांग्रेस की सक्रियता
दिल्ली में दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति का विरोध तेज, कांग्रेस की सक्रियता
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के संदर्भ में दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर विरोध प्रदर्शन का सिलसिला दिल्ली में जंतर मंतर पर गरमाया है। अंकिता के माता-पिता ने न्याय की मांग को लेकर धरना दिया, जिसमें कांग्रेस के राहुल और प्रियंका गांधी ने उनका समर्थन किया।
देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड में हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड में दुष्यंत गौतम नामी भाजपा नेता पर लगे आरोपों के चलते उनकी सिक्किम के राज्यपाल के रूप में पदस्थापना पर पॉलिटिकल स्टर्म शुरु हो गया है। इन विरोधों ने दिल्ली के जंतर मंतर तक पहुंचकर एक नई राजनीति का मोड़ ले लिया है। बुधवार को, अंकिता के माता-पिता ने जंतर मंतर पर धरना दिया, जिसमें कांग्रेस के प्रमुख नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने दौरा किया और उनकी मांगों का समर्थन किया।
सीबीआई जांच पूरी होने तक नियुक्ति का विरोध
अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने कहा, “जब तक सीबीआई जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। हमें इस मामले में न्याय की आवश्यकता है।” उन्होंनें राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील भी की। इस संबंध में कांग्रेस ने इसे जनभावनाओं के खिलाफ फैसला बताते हुए व्यापक प्रदर्शन की योजना बनाई है।
महत्वपूर्ण रूप से, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 12 अक्टूबर को दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति की घोषणा की थी। इसके तुरंत बाद, अंकिता के माता-पिता ने इस नियुक्ति के खिलाफ आवाज उठाई।
राहुल और प्रियंका का समर्थन
धरने में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की और कहा कि "न्याय के लिए उनका संघर्ष हमारे संघर्ष का हिस्सा है।" राहुल ने सोशल मीडिया पर भी अपने समर्थन का इजहार किया।
हालांकि, दुष्यंत गौतम को लेकर उठाए जा रहे सवालों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होनी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिन आरोपों पर चर्चा की जा रही है, क्या उनमें तथ्यात्मक सच्चाई है?
प्रकरण की नवीनता
सितंबर 2022 में अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उसके बाद से, इस मामले में विभिन्न विवाद उठते रहे हैं। अभी हाल ही में, तीन अभियुक्तों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। लेकिन दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के बाद, इस मामले ने एक बार फिर से गरमाया है और जांच की पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर किया है।
कांग्रेस के विरोध कार्यक्रम
उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सभी इकाइयों को कैंडल मार्च और मशाल जुलूस आयोजित करने का आदेश दिया है। उनका कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ अंकिता के परिवार की नहीं, बल्कि उत्तराखंड की भावनाओं से जुड़ी है।
महिला कांग्रेस भी इस मामले में सक्रिय हुई है और 15 अक्टूबर को प्रदर्शन का आयोजन कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि "इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता है और हमें अंकिता के लिए न्याय दिलाना है।"
इस दौरान, अंकिता के माता-पिता का धरना और राहुल-प्रियंका की उपस्थिती ने इस मुद्दे को एक बार फिर से चर्चा में ला दिया है। अब सभी की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन क्या कदम उठाते हैं।
अंकिता भंडारी मामले में उठते सवालों और दुष्यंत गौतम की नियुक्ति ने आगामी चुनावों में भाजपा के लिए नए चनौतियों का सामना करने का संकेत दिया है।
अब देखना यह है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या सीबीआई जांच सकारात्मक परिणाम प्रदान करती है।
यह मुद्दा न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि न्याय और मानवाधिकारों के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
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सौजन्य से, टीम अमrita बाजार पत्रिका
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