दिल्ली में संस्कृत शिक्षा का वैश्विक विस्तार: नई योजनाओं की घोषणा
दिल्ली में संस्कृत शिक्षा का वैश्विक विस्तार: नई योजनाओं की घोषणा
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नई दिल्ली। 1 से 3 जून के बीच, सचिव संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन दीपक कुमार की अगुवाई में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों के अधिकारियों ने भाग लिया। इस चर्चा का मुख्य विषय संस्कृत शिक्षा का संवर्धन और भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक प्रसार था।
कम शब्दों में कहें तो, दिल्ली में आयोजित इस बैठक में संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं की स्थापना के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार संस्कृत शिक्षा को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए गंभीर है।
संस्कृत शिक्षा का संवर्धन
इस बैठक के दौरान मौसमधार और विकास की नीतियों पर गहन चर्चा हुई। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की महानिदेशक के साथ बैठक में, यह निर्णय लिया गया कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार विभिन्न विषयों जैसे भारतीय संस्कृति, कर्मकांड, ज्योतिष, और जन्मपत्रिका निर्माण पर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम विकसित करेगा। इन पाठ्यक्रमों का संचालन ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। इसे देश-विदेश में संस्कृत शिक्षकों और छात्रों के रोजगार में वृद्धि करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, विदेश मंत्रालय के सहयोग से, संस्कृत शिक्षकों को वैश्विक स्तर पर रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा, विभिन्न भाषाओं में संस्कृत साहित्य का अनुवाद करने के लिए भी सहयोग की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटलाइजेशन
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित परियोजनाओं को भारतीय AI मिशन के तहत प्रस्तुत करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। यह कदम संस्कृत शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय के साथ भी डिजिटाइजेशन की दिशा में सकारात्मक चर्चा की गई। इसमें उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा परिषद, देहरादून के डिजिटाइजेशन की संभावनाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
संस्कृत ग्राम और शोध परियोजनाएं
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के साथ हुई बैठक में, संस्कृत शिक्षा के विस्तार और विभिन्न जनपदों में संस्कृत शिक्षण केंद्र स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। संस्कृत शिक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए, संस्कृत ग्राम को विकसित करने के लिए नए विचारों पर चर्चा की गई।
इस दौरान, दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने भी इस विषय में अपनी सहमति और सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के संस्कृत शिक्षा के विकास में वे हर संभव मदद करेंगे।
बैठकों के अंत में, सचिव दीपक कुमार ने संबंधित संस्थाओं को लिए गए निर्णयों को तत्काल लागू करने के निर्देश दिए। उनका उद्देश्य भविष्य में संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करना है।
संस्कृत शिक्षा के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए यह बैठक एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। संस्कृत भाषा न केवल हमारे सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस दिशा में उठाए गए कदम निश्चित रूप से शिक्षण के नए मानक स्थापित करने में मदद करेंगे।
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सादर, टीम अमृता बाजार पत्रिका
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