दिव्यांग को मिली नई जीवनरेखा: पेंशन, बैंक खाता और व्हीलचेयर

Jul 12, 2026 - 14:44
 130  501.8k
दिव्यांग को मिली नई जीवनरेखा: पेंशन, बैंक खाता और व्हीलचेयर
दिव्यांग को मिली नई जीवनरेखा: पेंशन, बैंक खाता और व्हीलचेयर

दिव्यांग को मिली नई जीवनरेखा: पेंशन, बैंक खाता और व्हीलचेयर

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika

कम शब्दों में कहें तो, जिला प्रशासन की संवेदनशीलता ने एक दिव्यांग व्यक्ति के जीवन में नया सवेरा लाया है।

देहरादून। अपर नत्थनपुर निवासी सुनील चन्द्र, जो दिव्यांगता के कारण कई सरकारी योजनाओं से वंचित थे, अब उन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र, मासिक दिव्यांग पेंशन, नया बैंक खाता और निःशुल्क व्हीलचेयर मिल चुकी है। यह पूरी प्रक्रिया प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता के कारण संभव हो पाई है।

सुनील, जो वर्षों से अपनी विकलांगता के कारण अपनी जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे थे, 29 जून को समाधान दिवस में उपस्थित हुए। उन्होंने जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान को अपनी विकलांगता और आर्थिक स्थिति के बारे में बताया। सुनील ने कहा, "साहेब, मैं बहुत गरीब हूं और स्वास्थ्य कारणों से काम करने में असमर्थ हूं। मुझे कोई सरकारी मदद नहीं मिलती और मैं बस जैसे-तैसे जी रहा हूं।"

जिलाधिकारी ने उनकी समस्या को गंभीरता से लिया और तुरंत उपाय करने का आदेश दिया। उन्होंने अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि सुनील को कोरोनेशन अस्पताल ले जाकर उनकी मेडिकल जांच की जाए और दिव्यांगता प्रमाण पत्र तुरंत जारी किया जाए। समाज कल्याण अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए कि तहसील प्रशासन के साथ मिलकर सुनील का आय प्रमाण पत्र तैयार किया जाए ताकि उनकी पेंशन का मामला आगे बढ़ सके।

जिलाधिकारी के निर्देशों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सुनील को 45 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जारी किया गया। इसके बाद, समाज कल्याण विभाग ने भी उनकी आय प्रमाण पत्र को जल्दी ही तैयार कराया। अग्निव महीना अगस्त से उनकी मासिक दिव्यांग पेंशन स्वीकृत कर दी गई।

हालांकि, मामला इतना सरल नहीं था। जब जांच की गई, तो पता चला कि सुनील का कोई बैंक खाता नहीं है। बिना बैंक खाते के, पेंशन की राशि कैसे आ सकती थी? इसलिए प्रशासन ने इंडियन पोस्ट पेमेंट बैंक के अधिकारियों से संपर्क किया। बैंक के कर्मचारी सीधे सुनील के घर गए और मौके पर उनका नया बैंक खाता खोला।

प्रशासन की इस त्वरित और सहायक कार्रवाई से सुनील के लिए न केवल पेंशन स्वीकृत हुई, बल्कि उन्हें एक नई व्हीलचेयर भी दी गई। सुनील ने इस सहायता के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और पूरी टीम का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "आज मैं महसूस कर रहा हूं कि सरकार सचमुच गरीबों के द्वार पर खड़ी है।"

यह घटना दिव्यांगों के लिए सरकारी सहायता प्रणाली की प्रभावशीलता को दर्शाती है, और यह इस बात का प्रमाण है कि अगर प्रशासनिक दृष्टिकोण दयालुता और परिश्रम से भरा हो, तो वह किस प्रकार जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

इस प्रकार की सकारात्मक कहानियों से हमें प्रेरणा मिलती है कि समाज में हर व्यक्ति के लिए सहायता जरूरी है, और हमें इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है।

अधिक अपडेट्स के लिए, [यहाँ क्लिक करें](https://amritabazaarpatrika.com).

Team Amrita Bazaar Patrika

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0