देवभूमि के सांस्कृतिक धरोहर ‘देवतत्व’ के संरक्षण में जुटी धामी सरकार

Mar 11, 2026 - 14:44
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देवभूमि के सांस्कृतिक धरोहर ‘देवतत्व’ के संरक्षण में जुटी धामी सरकार
देवभूमि के सांस्कृतिक धरोहर ‘देवतत्व’ के संरक्षण में जुटी धामी सरकार

देवभूमि के सांस्कृतिक धरोहर ‘देवतत्व’ के संरक्षण में जुटी धामी सरकार

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की धामी सरकार देवभूमि की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में कई महत्वपूर्ण योजनाएँ लागू करने जा रही है।

देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत

उत्तराखंड, जिसे देवभूमि भी कहा जाता है, अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की पर्वत श्रृंखलाएँ, नदियाँ, और मंदिर न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि यहाँ की संस्कृति एवं परंपराओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री धामी का यह प्रयास न केवल धार्मिक स्थलों की रक्षा करना है, बल्कि पूरे राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर रखना है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट

मुख्यमंत्री धामी ने ऐलान किया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में विशेष रूप से हरिद्वार कुंभ, हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, तथा नंदा देवी राजजात जैसी परियोजनाओं का ध्यान रखा जाएगा। इन योजनाओं का उद्देश्‍य है कि ना केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले।

हरिद्वार कुंभ—एक ऐतिहासिक अवसर

हरिद्वार कुंभ मेला, जिसे हर 12 वर्ष में मनाया जाता है, इस प्रदेश की धार्मिक पहचान का प्रतीक है। धामी सरकार का लक्ष्य है कि इस मेले को और अधिक व्यवस्थित किया जाए, ताकि लाखों श्रद्धालुओं को यहाँ आने में सुविधा हो। सरकार ने जागरूकता कार्यक्रमों और स्वच्छता उपायों पर जोर देने का आश्वासन दिया है।

गंगा कॉरिडोर—संपर्क एवं विकास का रास्ता

हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर की योजना का उद्देश्य क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना है। यह परियोजना न केवल यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि स्थानीय व्यवसायों और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगी।

नंदा देवी राजजात—संस्कृति संरक्षित करने की राह

नंदा देवी राजजात भी उत्तराखंड की एक महत्वपूर्ण परंपरा है। धामी सरकार ने इसके संरक्षण के लिए विशेष ध्यान देने की योजना बनाई है। यह न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्व रखता है।

क्यों है यह प्रयास महत्वपूर्ण?

सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल संरक्षण का मामला नहीं है, बल्कि यह एक पहचान और इतिहास में शामिल करने का भी एक प्रयास है। जब हमारी सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित होती है, तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अद्भुत आशीर्वाद बन जाती है। देवभूमि की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यहां के लोगों को भी रोजगार एवं विकास के नए अवसर मिलेंगे।

निष्कर्ष

धामी सरकार का देवभूमि की धरोहर ‘देवतत्व’ को संवारने का प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है। यह कदम न केवल उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि यहाँ के विकास में भी सहायक सिद्ध होगा।

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टीम अमृता बाजार पत्रिका

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