देहरादून: पिता की भरण-पोषण की अवहेलना पर डीएम ने पुत्र के खिलाफ 1.50 लाख की आरसी जारी की

Feb 10, 2026 - 14:44
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देहरादून: पिता की भरण-पोषण की अवहेलना पर डीएम ने पुत्र के खिलाफ 1.50 लाख की आरसी जारी की
देहरादून: पिता की भरण-पोषण की अवहेलना पर डीएम ने पुत्र के खिलाफ 1.50 लाख की आरसी जारी की

देहरादून: पिता की भरण-पोषण की अवहेलना पर डीएम ने पुत्र के खिलाफ 1.50 लाख की आरसी जारी की

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में एक बेटे के खिलाफ उसके बीमार पिता को भरण-पोषण का धन न देने पर जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। 68 वर्षीय बुजुर्ग ने जनदर्शन में उपस्थित होकर अपने पुत्र द्वारा अपने साथ किए गए अन्याय का मामला उठाया, जिसके बाद डीएम ने 1.50 लाख रुपये की आरसी जारी की।

मामले का पृष्ठभूमि

देहरादून में एक 68 वर्षीय बुजुर्ग बीमार पिता ने अपने पुत्र के खिलाफ भरण-पोषण अधिनियम का उल्लंघन करने की शिकायत की। इस मामले में यह आरोप लगाया गया कि पुत्र ने न केवल अपने पिता को संपत्ति से बेदखल किया, बल्कि भरण-पोषण के लिए निर्धारित धनराशि भी नहीं दी, जो कि कानूनी जिम्मेदारी थी।

डीएम की कार्रवाई

जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया और डीएम ने अवहतलना के कारण बेटे के खिलाफ 1.50 लाख की आरसी (राशि वसूली) जारी की। यह कदम स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि सरकार अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कैसे सख्त कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

भरण-पोषण अधिनियम की महत्ता

भारत में भरण-पोषण अधिनियम का उद्देश्य परिवार के सदस्यों की बुनियादी आवश्यकताओं को सुनिश्चित करना है, विशेष रूप से बुजुर्ग और कमजोर लोगों के लिए। यह क़ानून यह सुनिश्चित करता है कि वे अपनी देखभाल और भरण-पोषण का हक रखते हैं। ऐसे मामलों में, जहां परिवार के सदस्यों द्वारा आधारभूत समर्थन का अभाव होता है, अदालतों और प्रशासनिक निकायों का दखल आवश्यक हो जाता है।

समाज में बढ़ती जागरूकता

इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि समाज में वृद्धोपेक्षा और परिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। लोग अब अपने अधिकारों के प्रति सजग हो रहे हैं और जरूरत पड़ने पर प्रशासन का सहारा ले रहे हैं।

निष्कर्ष

मामला यह साबित करता है कि जिला प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सचेत है और नागरिकों के अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता रखता है। इस तरह के मामले समाज को शिक्षित करने का भी कार्य करते हैं और यह बताते हैं कि परिवारिक संबंधों में एक-दूसरे के प्रति क्या जिम्मेदारियाँ होनी चाहिए।

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लेखिका: प्रिया शर्मा

संपादक, Amrita Bazaar Patrika

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