देहरादून: हाई स्कूल शिक्षकों के लिए खास ‘टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट’ की मांग, जानें पूरी जानकारी
हाई स्कूल शिक्षकों के लिए विशेष ‘टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट’ की मांग
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय से प्रभावित हजारों सरकारी स्कूल शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में, उत्तराखंड के प्राथमिक शिक्षकों के संगठन ‘प्राथमिक शिक्षक संघ’ (PSS) ने राज्य सरकार से आपातकालीन कदम उठाते हुए मौजूदा सरकारी प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूल शिक्षकों के लिए एक विशेष ‘टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट’ (TET) आयोजित करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को एक नई दिशा दी है। इस आदेश के पश्चात, जिन शिक्षकों ने बिना उचित योग्यता के अपनी सेवाएं दी हैं, उनके भविष्य को लेकर गहरा संकट उत्पन्न हो गया है। इस स्थिति का खामियाजा उठाते हुए प्राथमिक शिक्षक संघ ने ऐसे शिक्षकों को बचाने एवं उनकी योग्यता को मान्यता देने हेतु टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट आयोजित करने का सुझाव दिया है।
प्राथमिक शिक्षक संघ की मांग
प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस टेस्ट के माध्यम से न केवल शिक्षकों की योग्यता को सुनिश्चित किया जाएगा, बल्कि यह उनकी नौकरी की स्थिरता को भी बनाए रखेगा। संघ ने यह भी कहा है कि, "हम चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द इस टेस्ट की प्रक्रिया को शुरू करे ताकि शिक्षकों को मानसिक तनाव से राहत मिल सके।"
क्या है टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट?
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट एक परीक्षा है, जिसे माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के लिए योग्यता प्रमाणित करने हेतु आयोजित किया जाता है। इस परीक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि शिक्षक शिक्षा प्रणाली में योगदान देने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल रखते हैं या नहीं।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार की ओर से इस विषय पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन शिक्षा मंत्री ने बताया है कि वे इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तत्पर हैं।
शिक्षकों के भविष्य को लेकर चिंताएं
इस मामले से जुड़े शिक्षकों ने कहा है कि, "हमारी मेहनत और शिक्षा को साधारण परीक्षणों के आधार पर नकारा नहीं जा सकता। हमें खुद में विश्वास है और हमारे पास अनुभव है, जो इस परीक्षा में हमारे लिए एक सकारात्मक पक्ष रहेगा।"
अन्य राज्यों में भी चल रही है बहस
उत्तराखंड में चल रही इस बहस के बीच अन्य राज्यों में भी शिक्षकों की नियुक्ति और उनके अधिकारों को लेकर विचार-विमर्श हो रहा है। ऐसे में, यदि उत्तराखंड सरकार शिक्षकों के हित में विशेष टेस्ट आयोजित करती है तो यह एक मिसाल बनेगा।
अंत में, यह देखना बहुत महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस मांग के प्रति क्या कदम उठाती है। खासकर जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसके सामने शिक्षकों की सुरक्षा का मामला आ गया है।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
(आरती शर्मा)
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