धनगढ़ी पुल: कुमाऊँ-गढ़वाल के लिए विकास की नई राह - 26 करोड़ की लागत से शुरू

Jul 6, 2026 - 07:44
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धनगढ़ी पुल: कुमाऊँ-गढ़वाल के लिए विकास की नई राह - 26 करोड़ की लागत से शुरू
धनगढ़ी पुल: कुमाऊँ-गढ़वाल के लिए विकास की नई राह - 26 करोड़ की लागत से शुरू

धनगढ़ी पुल: कुमाऊँ-गढ़वाल के लिए विकास की नई राह - 26 करोड़ की लागत से शुरू

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कम शब्दों में कहें तो, रामनगर में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 26 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित धनगढ़ी पुल का उद्घाटन किया। यह पुल कुमाऊँ और गढ़वाल के बीच आवागमन को सुलभ बनाएगा और बरसात के दौरान मार्ग अवरुद्ध होने की समस्या से राहत प्रदान करेगा।

इस पुल का उद्घाटन रविवार को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-121 (नया राष्ट्रीय राजमार्ग-309) पर हुआ, जिससे कुमाऊँ और गढ़वाल के बीच यात्रा सुगम हो जाएगी।

धनगढ़ी पुल का महत्व

धनगढ़ी सेतु, जो 220.90 मीटर लंबा है, गढ़वाल एवं कुमाऊँ के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग को सुदृढ़ करेगा। यह मार्ग विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का भी प्रमुख प्रवेश द्वार है। इस पुल के माध्यम से नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत और पौड़ी गढ़वाल जैसे स्थलों की यात्रा में सहूलियत होगी।

धनगढ़ी नाले में बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने से पहले इस मार्ग पर यात्रा करना मुश्किल हो जाता था। इससे न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पर्यटकों और आपातकालीन सेवाओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब इस पुल के निर्माण से इन समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित होगा।

सरकारी योजना और लाभ

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुल केवल एक आधारभूत संरचना का निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्रवासियों के संघर्ष की परिणति है। उन्होंने कहा कि यह पुल विकास के नए युग का प्रतीक बनेगा, जो कुमाऊँ और गढ़वाल की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।

राज्य सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए समय पर पूरा किया है। इससे ना केवल यात्रा सुगम होगी, बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन, और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की प्राथमिकता अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना है।

वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण

पुल के निर्माण से वन क्षेत्र में यातायात में वृद्धि होने से वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिलेगा। धनगढ़ी पुल

पुल के निर्माण की चुनौतियाँ

गढ़वाल सांसद बलूनी ने पुल के निर्माण से स्पष्ट किया कि इसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने कहा कि 2019 में धनगढ़ी नाले में दर्दनाक दुर्घटनाओं ने इस पुल के निर्माण की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया था।

पुल का निर्माण 2020 के अंत में शुरू हुआ था। लेकिन एलीफैंट कॉरिडोर के कारण यह प्रोजेक्ट कुछ समय के लिए रुक गया था। माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पुल के पिलरों को रीडिज़ाइन करना पड़ा। सभी आवश्यक तकनीकी मानकों का पालन करते हुए, पुल का कार्य गुणवत्ता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरा किया गया।

भविष्य की दिशा

मुख्यमंत्री ने उन योजनाओं का उल्लेख किया जिनका शिलान्यास किया जा चुका है और आश्वस्त किया कि जनता को शीघ्र लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, रामनगर-रानीखेत मोटर मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर भी सकारात्मक बातचीत प्रारंभ की गई है।

कुल मिलाकर, धनगढ़ी पुल की उपस्थिति से कुमाऊँ और गढ़वाल के बीच आवागमन की गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस पुल के उद्घाटन के साथ, यह साफ है कि विकास की नई राहें खुल रही हैं, जो स्थानीय लोगों के लिए समृद्धि और बेहतर जीवन स्तर की उम्मीद को जागृत करेंगी।

इस ऐतिहासिक उद्घाटन पर उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों ने इस परियोजना के महत्व को स्वीकार किया और सभी ने विकास के इस प्रयास की सराहना की।

इस पुल के माध्यम से जुड़ने वाले क्षेत्र को उम्मीद है कि यह न केवल यात्रा को सुगम बनाएगा, बल्कि पर्यटकों और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा देगा।

इसमें भागीदारी के लिए सभी कार्यकर्ताओं, अधिकारियों और श्रमिकों का धन्यवाद।

केवल एक पुल का निर्माण नहीं, बल्कि यह एक नई शुरुआत है, सुरक्षित आवागमन और सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में।

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Team Amrita Bazaar Patrika, आर्या मेहता

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