नंदा की चौकी पुल हादसा: सीएम धामी के निर्देश पर PWD के ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
नंदा की चौकी पुल हादसा: PWD के अधिकारियों का निलंबन
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कम शब्दों में कहें तो 28 जुलाई को नंदा की चौकी के पास टोंस नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड धंस गई थी, जिससे लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। अब शासन ने इस मामले में कठोर कदम उठाए हैं।
28 जुलाई 2023 को देहरादून जिले के नंदा की चौकी स्थित पुल की एप्रोच रोड के धंसने की घटना ने सभी को चौंका दिया। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब स्थानीय लोगों ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें पुल की एप्रोच रोड धंसने का दृश्य साफ देखा जा सकता था। इसके बाद, इस घटना ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सरकार की कार्रवाई
प्रदेश सरकार ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई करने का निर्णय लिया। राज्य की उच्च अधिकारियों की एक बैठक के बाद यह तय किया गया कि लापरवाही बरतने के लिए PWD के तीन अधिकारियों को निलंबित किया जाएगा। इसमें अधिशासी अभियंता (EE) राजेश कुमार, सहायक अभियंता (AE) अमित त्यागी और कनिष्ठ अभियंता (JE) नवीन गैरोला शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों के खिलाफ दीर्घ शास्ति की अनुशंसा की गई है।
लोनिवि सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि इन अधिकारियों ने तकनीकी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण, अनुबंधीय शर्तों का अनुपालन और दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया। यह साफ है कि इस लापरवाही के चलते क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ।
जांच की प्रक्रिया
मुख्य अभियंता ने 3 अगस्त को इस मामले की जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी। रिपोर्ट में पाया गया कि पुल की एप्रोच रोड की डिजाइन और निर्माण में कई चूकें हुई हैं, जिसके परिणामस्वरूप यह हादसा हुआ। इसके अलावा, विभाग के विभिन्न स्तरों पर पर्यवेक्षण में कमी और धांधली की शिकायतें भी सामने आई थीं।
भविष्य की दिशा
इस घटना ने PWD क ी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसके बाद से ही प्रशासन ने ठेकेदारों और इनसे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने सभी ठेकेदारों और डिजाइन कंसलटेंट के खिलाफ जांच शुरू की है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
नंदा की चौकी पुल हादसा महज एक घटना नहीं है, बल्कि यह सरकार की निर्माण गुणवत्ता और निरीक्षण प्रणाली में सुधार करने का एक अवसर भी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस घटना से क्या सीख लेती है और भविष्य में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाएगी।
आम जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है, और इस तरह के हादसों से बचने के लिए सही और सख्त कदम उठाना आवश्यक है। उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में ठोस कार्रवाई करेगी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करेगी।
इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखते हुए जनहित में अपेक्षाएं हैं कि भविष्य में भर्तियों में गुणवत्ता पर ध्यान देने के साथ ही जिम्मेदारियों का सही निर्वहन किया जाए।
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सधन्यवाद,
टीम अमरिता बाजार पत्रिका
शिवानी शर्मा
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