नव दुर्गा मंदिर में भव्य अष्टोत्तरशत श्रीमद्भागवत महापुराण का आयोजन, तैयारियों की बैठक संपन्न
नव दुर्गा मंदिर में भव्य अष्टोत्तरशत श्रीमद्भागवत महापुराण का आयोजन, तैयारियों की बैठक संपन्न
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कम शब्दों में कहें तो, आगामी 10 से 17 नवंबर तक टिहरी गढ़वाल के नव दुर्गा मंदिर, बौराड़ी में अष्टोत्तरशत श्रीमद्भागवत महापुराण का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस आयोजन की तैयारियों को लेकर आयोजित दूसरे महत्वपूर्ण बैठक की चर्चाएँ संपन्न हुईं एवं आगामी कार्यक्रम के लिए रूपरेखा तैयार की गई।
टिहरी गढ़वाल 15 जुलाई। ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी माधवाश्रम जी महाराज की पुण्य स्मृति में होने वाले इस आयोजन की तैयारी के लिए बौराड़ी सामुदायिक मिलन केंद्र में बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिसमें आयोजन की रूपरेखा, समिति का विस्तार, विभिन्न व्यवस्थाएँ और कार्यक्रम के सफल संचालन पर चर्चा की गई।
बैठक में चर्चा के मुख्य बिंदु
बैठक में सभी सदस्यों ने आयोजन की रूपरेखा और समिति का विस्तार करने पर विचार किया।
- बैठक में आयोजन की तैयारी और जनसहभागिता पर विस्तृत चर्चा की गई।
- अगली बैठक अगस्त के पहले सप्ताह में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
कार्यक्रम संयोजक पंडित राजेंद्र प्रसाद चमोली शास्त्री ने बैठक में उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों से कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि यह एक सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन है, जिसमें समाज के सभी वर्गों की सहभागिता आवश्यक है।
असम्भावित विषय और संपर्क प्रयास
इस अवसर पर, पंडित चमोली ने बताया कि नई टिहरी, ऋषिकेश, देहरादून और अन्य क्षेत्रों में प्रबुद्ध जनों और संत-महात्माओं से संपर्क कर बैठकें आयोजित की जाएंगी।
बैठक में बी.डी. कुनियाल (प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, नई टिहरी), उर्मिला राणा (सभासद), केदार सिंह पंवार, संजय ढौंडियाल, सूरत सिंह राणा, भगवान चंद रमोला, बिजेंद्र रमोला, यशपाल राणा, आनंद तोपवाल, गोविंद पुंडीर, किशोरी लाल चमोली सहित अन्य गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए। सभी ने आयोजन को सफल बनाने का आश्वासन दिया।
निष्कर्ष
अंत में, पंडित राजेंद्र प्रसाद चमोली शास्त्री ने सभी नगरवासियों एवं श्रद्धालुओं से अष्टोत्तरशत श्रीमद्भागवत महापुराण के भव्य आयोजन में तन, मन और धन से सहयोग देने का आग्रह किया। इस आयोजन की महत्ता न केवल धार्मिक है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत को भी आगे बढ़ाने का कार्य करेगा।
इस प्रकार, अष्टोत्तरशत श्रीमद्भागवत महापुराण के इस भव्य आयोजन की तैयारियों की दिशा में आयोजित बैठक एक सकारात्मक कदम है, जिसमें सभी स्थानीय समुदायों को सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया है।
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टीम अमृता बाजार पत्रिका
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