पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति को मिला प्रतिष्ठित डेयरी विज्ञान सम्मान
पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति को मिला प्रतिष्ठित डेयरी विज्ञान सम्मान
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कम शब्दों में कहें तो, पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान ने राष्ट्रीय स्तर पर डेयरी विज्ञान अनुसंधान में अद्वितीय योगदान के लिए 'प्रो. एम.आर. श्रीनिवासन मेमोरियल लेक्चर एवं ओरेशन अवॉर्ड' प्राप्त किया है।
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान को हाल ही में इंडियन डेयरी एसोसिएशन द्वारा आयोजित 52वें डेयरी इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस, नई दिल्ली में इस सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान उनके द्वारा की गई उल्लेखनीय वैज्ञानिक कार्यों और डेयरी अनुसंधान में योगदान को मान्यता देने के लिए दिया गया है।
सम्मान का महत्व
‘प्रो. एम.आर. श्रीनिवासन मेमोरियल लेक्चर एवं ओरेशन अवॉर्ड’ भारतीय डेयरी क्षेत्र में एक सम्मानित पुरस्कार है, जो कि देश के प्रमुख डेयरी वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं के कार्यों को मान्यता देने के लिए स्थापित किया गया है। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने डेयरी विज्ञान में अभूतपूर्व योगदान दिया है।
कुलपति का योगदान
प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान का कार्य क्षेत्र केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक प्रेरणादायक नेता और शिक्षक भी हैं। उनके नेतृत्व में, पंतनगर विश्वविद्यालय ने विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त की हैं। वे लगातार अपने छात्रों और युवा वैज्ञानिकों को नवीनतम तकनीकों और अनुसंधान विधियों से परिचित कराते रहे हैं।
डेली इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस में उनकी उपस्थिति
इस सम्मान के मौके पर आयोजित 52वें डेयरी इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस में अनेक नामी वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस कांफ्रेंस में डेयरी उद्योग की चुनौतियों, नवोन्मेष और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। प्रोफेसर चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि डेयरी विज्ञान में अनुसंधान और प्रौद्योगिकी का उपयोग हमारे देश के डेयरी उत्पादकों की स्थिति को मजबूत कर सकता है।
आगे की योजनाएं
प्रो. चौहान का मानना है कि भारतीय डेयरी उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर अनुसंधान और विकास की आवश्यकता है। उन्होंने इस सम्मान को एक प्रेरणा के रूप में लिया है और उन्होंने यह भी कहा कि वे आगे भी नए विचारों और अनुसंधान की दिशा में काम करते रहेंगे। उनकी योजना है कि वह डेयरी विज्ञान में और अधिक नवाचार लाना चाहेंगे।
इस प्रकार, प्रोफेसर चौहान की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्वविद्यालय और देश के डेयरी अनुसंधान के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उनके कार्यों को यह पुरस्कार मान्यता देता है, और आगे चलकर यह भारतीय डेयरी उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
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