पिथौरागढ़ में बेटियों के नाम से घरों की पहचान, जिलाधिकारी की विशेष पहल “मेरी चेली म्यार घरै पछयांण” शुरू
पिथौरागढ़ में बेटियों के नाम से घरों की पहचान, जिलाधिकारी की विशेष पहल “मेरी चेली म्यार घरै पछयांण” शुरू
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कम शब्दों में कहें तो, पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी ने एक अद्वितीय पहल शुरू की है, जिसके तहत बेटियों के नाम से घरों की पहचान की जाने लगेगी। यह अभिनव अभियान “मेरी चेली म्यार घरै पछयांण” के नाम से जाना जाएगा, जो लिंगानुपात सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अभियान का उद्देश्य
डीएम की यह पहल उनके कार्य क्षेत्र में बालिकाओं के जन्म को बढ़ावा देने और समाज में लड़कियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए है। पिथौरागढ़ जनपद के कनालीछीना में इस अभियान की शुरुआत की गई है। यह लोक कल्याण के लिए एक सकारात्मक मंशा के साथ किया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।
समाज में बदलाव की दिशा में कदम
भारत में लिंगानुपात में सुधार लाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। मर्द-प्रधान सोच और विभिन्न सामाजिक उत्पीड़न के कारण लड़कियों के जन्म को लेकर अक्सर समाज में हिकारत दिखाई देती है। ऐसे में, जिलाधिकारी की यह पहल न केवल बेटियों को सम्मानजनक पहचान दिलाने का प्रयास है, बल्कि यह समाज में बदलाव की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या है “मेरी चेली म्यार घरै पछयांण”?
इस अभियान के अंतर्गत, बेटियों का नाम लेकर घरों की पहचान की जाएगी, जिससे यह संदेश भी जाएगा कि बेटियां समाज का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह अभियान न केवल गणितीय आंकड़ों में सुधार लाने का प्रयास करता है, बल्कि सामाजिक सोच को भी बदलता है।
क्यूं है यह पहल महत्वपूर्ण?
अधिकतर समाज में लड़कियों के जन्म से पहले ही उनके प्रति नकारात्मक सोच देखी जाती है। इस प्रकार के अभियानों से अभिभावकों को यह महसूस होगा कि उनकी बेटियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। इसके माध्यम से, भविष्य में होने वाले जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य मामलों में भी सुधार की संभावना है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है और इसका समर्थन जताया है। महिलाएं इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रही हैं। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य को भी एक नई पहचान मिलेगी।
आगे की योजना
इस पहल के बाद, अन्य जगहों पर भी इसे लागू करने की योजना बनाई जा रही है। यदि यह अभियान सफल रहता है, तो इसे अन्य जनपदों में भी फैलाने की संभावना है। कई महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता इसे एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जो समाज में बहुसंख्यक सुधार की दिशा में अग्रसर है।
जिलाधिकारी की यह पहल निश्चित रूप से पिथौरागढ़ की महिलाओं और बेटियों के लिए एक आशा की किरण बनकर उभरी है।
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Team Amrita Bazaar Patrika
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