पीसी ध्यानी को पिटकुल के प्रबंध निदेशक पद से मुक्त किया गया
पीसी ध्यानी को पिटकुल के प्रबंध निदेशक पद से मुक्त किया गया
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कम शब्दों में कहें तो - हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के बाद पीसी ध्यानी को पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक पद के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। अपर सचिव मेहरबान सिंह बिष्ट को नया चार्ज सौंपा गया है।
उत्तराखंड, देहरादून: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) में महत्वपूर्ण परिवर्तन की दिशा में कदम उठाते हुए पीसी ध्यानी को प्रबंध निदेशक के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया है। यह निर्णय न्यायालय की सख्ती और अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद लिया गया है।
हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश
पिछले कुछ समय से यह मामला चर्चा में था जब यह साफ हो गया कि पीसी ध्यानी जैसे गैर-इंजीनियर अधिकारी को ऊर्जा निगम के शीर्ष पद पर जिम्मेदारी देना ठीक नहीं है। उच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रबंध निदेशक के लिए उचित और नीति अनुसार नियुक्ति होनी चाहिए, न कि अस्थायी प्रभार रखना चाहिए। इसी क्रम में न्यायालय ने अतिरिक्त प्रभार समाप्त करने के निर्देश दिए थे।
नए प्रबंध निदेशक का चार्ज
नए आदेश के अनुसार, अपर सचिव मेहरबान सिंह बिष्ट को पिटकुल के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह व्यवस्था अस्थायी होगी, जब तक नियमित नियुक्ति नहीं की जाती या शासन के अगले आदेश नहीं आते। बताया गया कि मेहरबान बिष्ट अब पिटकुल की जिम्मेदारी संभालेंगे, जो कि एक महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसमें ऊर्जा नीति और संचलन से संबंधित कई फैसले शामिल होंगे।
पीसी ध्यानी का कार्यकाल
भले ही पीसी ध्यानी ने प्रबंध निदेशक के पद का अतिरिक्त कार्यभार 10 सितंबर 2022 को संभाला था, लेकिन अब उन्हें न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए कार्यमुक्त किया गया है। उन्हें लगभग तीन वर्षों से दोनों दायित्व निभाने का अनुभव था, लेकिन उच्च न्यायालय के निर्णय ने उनके कार्यकाल पर एक नई दृष्टिकोण प्रस्तुत की है।
राज्य सरकार के साथ तैयारी में संशोधन
आपको बता दें कि अब राज्य सरकार ऊर्जा निगमों में शीर्ष पदों की नियुक्ति के नियमों में संशोधन की भी तैयारी कर रही है। ऐसे में संभव है कि प्रबंध निदेशक के पद के लिए इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि की अनिवार्यता संबंधी प्रावधान में बदलाव का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष लाया जाए। यह निर्णय किन्हीं संभावित अव्यवस्थाओं से बचने और कुशल नेतृत्व सुनिश्चित करने की दृष्टि से लिया जा सकता है।
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संगठन के तहत की गई यह कार्रवाई न केवल न्यायालय के आदेश की अनुपालन का परिचायक है बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और उचित नीतियों को लागू करने की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।
सारांश में, यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड में ऊर्जा निगमों की शीर्ष पदों का चयन प्रोफेशनलिज्म और गुणवत्ता की ओर बढ़ने का प्रयास है।
सादर,
टीम अम Rita Bazaar Patrika
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