भूमि हस्तांतरण के खिलाफ बढ़ते आंदोलन ने पावर सेक्टर में हलचल मचाई
भूमि हस्तांतरण के खिलाफ बढ़ते आंदोलन ने पावर सेक्टर में हलचल मचाई
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में पावर सेक्टर से जुड़े भूमि हस्तांतरण के खिलाफ संघर्ष तेज हो रहा है। अभियंताओं की नाराजगी, लंबित मांगों और आंदोलन की स्थिति गंभीर होती जा रही है।
देहरादून: उत्तराखंड में पावर सेक्टर से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अभियंता संघों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। जल विद्युत परियोजनाओं की भूमि निजी कंपनियों को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव का विरोध केवल पेशेवरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश भर में जनहित का सवाल भी उठता है।
जल विद्युत परियोजनाओं की भूमि हस्तांतरण का विरोध
पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजकर जल विद्युत परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमि को यूआईआईडीबी (UIIDB) को आवंटित करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने इस पत्र में कहा है कि यह निर्णय प्रदेश के हितों के खिलाफ है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि कुल 76.7348 हेक्टेयर भूमि, जो डाकपत्थर एवं ढालीपुर स्थित जल विद्युत परियोजनाओं से संबंधित है, शासनादेश के माध्यम से इस भूमि को हस्तांतरित करने के आदेश दिए गए हैं। डेटा के अनुसार, यह भूमि अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से जल विद्युत परियोजनाओं के वर्तमान संचालन एवं भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखते हुए आवंटित की गई थी।
ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा
पावर इंजीनियर्स संघ ने चेतावनी दी है कि इस भूमि हस्तांतरण से प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसके अलावा, यमुना पुनर्जीवन योजना जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावनाएं हैं। संघ ने मांग की है कि भूमि हस्तांतरण आदेश को तुरंत निरस्त किया जाए।
अगर पावर सेक्टर की भूमि का एकतरफा हस्तांतरण जारी रहा, तो देशभर के बिजली कर्मी एवं इंजीनियर आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
विरोध सभा का आयोजन
इस बीच, उत्तरांचल पॉवर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने यूपीसीएल मुख्यालय में अपना चरणबद्ध आंदोलन जारी रखा है। यह विरोध सभा अधिशासी अभियंता के 40 रिक्त पदों पर पदोन्नति न किए जाने पर केंद्रित है। सभा की अध्यक्षता अधीक्षण अभियंता मनदीप सिंह राणा ने की। महासचिव राहुल चानना के अनुसार, न्यायालय के आदेश के बावजूद अब तक पदोन्नति की प्रक्रिया में कोई प्रगति नहीं हुई है।
अभियंताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान में 93 स्वीकृत पदों में से 40 से अधिक पद रिक्त हैं, जिससे कार्यभार बढ़ गया है और जनता को मिलने वाली सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 11 फरवरी, 2026 को फिर से यूपीसीएल मुख्यालय में विरोध सभा आयोजित की जाएगी।
निष्कर्ष
उत्तराखंड के पावर सेक्टर में चल रहे इस विरोध का अगर उचित समाधान नहीं किया गया, तो इससे आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार एवं संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना होगा। यदि सख्त कदम उठाए जाते हैं, तो न केवल अभियंताओं का आक्रोश कम होगा, बल्कि प्रदेश की ऊर्जा नीति में भी सुधार होगा।
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साभार, टीम अमृत बाजार पत्रिका - साक्षी कुमारी
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