महिला कांग्रेस ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर उठाई आवाज, फीस वृद्धि पर सख्त नियंत्रण की मांग
महिला कांग्रेस ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर उठाई आवाज, फीस वृद्धि पर सख्त नियंत्रण की मांग
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika
कम शब्दों में कहें तो, महिला कांग्रेस ने टिहरी गढ़वाल में प्राइवेट स्कूलों की फीस वृद्धि और अन्य मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है। आगामी दिनों में अभिभावकों को राहत देने के लिए जिला प्रशासन को हस्तक्षेप करने की जरुरत है।
टिहरी गढ़वाल, 16 अप्रैल 2026। महिला कांग्रेस कमेटी टिहरी गढ़वाल की जिलाध्यक्ष श्रीमती आशा रावत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि प्राइवेट विद्यालयों द्वारा प्रतिवर्ष मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई जा रही है। अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालते हुए इन विद्यालयों में प्रवेश शुल्क, तीन माह की अग्रिम ट्यूशन फीस,कॉपी-किताबों और अन्य मदों में अतिरिक्त शुल्क भी लिया जा रहा है।
अभिभावकों के संघर्ष को ध्यान में रखें
महिला कांग्रेस ने इस मनमानी को अत्यंत दुखदायी बताते हुए प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग की। जिलाध्यक्ष आशा रावत ने कहा कि बढ़ती शिक्षा लागत के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए अपने बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि निजी स्कूलों की फीस संरचना की सही तरीके से जांच की जाए ताकि सभी को सही और सस्ती शिक्षा मिल सके।
महिला कांग्रेस की प्रमुख मांगें
महिला कांग्रेस ने ज्ञापन में कुछ प्रमुख मांगें की हैं:
- प्राइवेट स्कूलों द्वारा वसूली जा रही फीस की संरचना की जांच की जाए।
- अभिभावकों को राहत प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
- शिक्षा के महत्व के लिए कोई भी वित्तीय बोझ नहीं होना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोग
ज्ञापन सौंपने के दौरान महिला कांग्रेस के अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद थे, जिनमें ममता उनियाल, अनिता रावत, शगुफ्ता परवीन, अनिता शाह और अन्य प्रमुख नाम शामिल थे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से इस मुद्दे का तुरंत समाधान निकालने की अपील की।
भविष्य की राह
पारिवारिक बजट पर अत्यधिक दबाव डालने वाली इस स्थिति को देखकर साफ है कि यदि प्रशासन द्वारा जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले समय में अभिभावकों का संघर्ष और भी बढ़ सकता है। सामाजिक रूप से जिम्मेदार संगठनों और संस्थाओं को भी इस मोर्चे पर सक्रिय होना होगा।
अंत में, यह महत्वपूर्ण है कि सभी वर्गों की भलाई के लिए शिक्षा का खर्च सही ढंग से प्रबंधित किया जाए। इसके लिए महिला कांग्रेस जैसे संगठन जो आवाज उठाते हैं, उनके प्रयासों को सराहा जाना चाहिए।
यह मुद्दा अब केवल टिहरी गढ़वाल का नहीं रह गया है बल्कि पूरे देश में शिक्षा की सस्ती पहुंच की समस्या बनती जा रही है। इसके लिए शासन और प्रशासन को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। अधिक अपडेट्स के लिए, हमारी वेबसाइट पर जाएं यहां।
टीम अमृता बाजार पत्रिका, प्रियंका शर्मा
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0