मीना कुमारी का आत्मिक प्रेम: अंतिम समय तक निभाया साथ
मीना कुमारी का आत्मिक प्रेम: अंतिम समय तक निभाया साथ
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कम शब्दों में कहें तो, मीना कुमारी और सावन कुमार टाक का रिश्ता एक गहरी आत्मीयता का प्रतीक था, जो उनके अंतिम समय तक बना रहा। उनकी कहानी एक अद्वितीय प्यार की है, जिसमें रूहानी इश्क की झलक मिलती है।
जब मीना कुमारी ने कहा, "तुम पहले शख्स हो, जिसमें मुझे खुदा दिखता है," तो यह सिर्फ एक भावुक अभिव्यक्ति नहीं थी, बल्कि उनके दिल की गहराईयों में छिपी सच्चाई थी। बीमारी के समय में सावन कुमार टाक के साथ बिताए लम्हे इस प्रेम कहानी को एक विशेष स्थान देते हैं। आइए, जानते हैं उनकी अद्भुत प्रेम कहानी के बारे में।
सावन कुमार टाक, जिनकी उम्र उस समय 22-23 वर्ष थी, ने अपने करियर की शुरुआत 'गोमती के किनारे' फिल्म की कहानी लिखने से की थी। उनके दोस्त बी.एन. शर्मा, जो स्वयं एक फिल्म निर्माता थे, ने सुझाव दिया कि इस भूमिका का न्याय करने के लिए बस मीना कुमारी ही सही विकल्प हैं। किंतु, यह चिंता थी कि क्या मीना कुमारी जैसे बड़े सितारे के पास इस फिल्म में काम करने का समय होगा।
सावन ने हिम्मत जुटाते हुए एक दिन मीना कुमारी के घर फोन किया। वहाँ उन्होंने मीना कुमारी की बहन खुर्शीद से बातचीत की। खुर्शीद ने बताया कि मीना कुमारी ने सावन को घर बुलाने का आदेश दिया। जब सावन घर पहुँचे, तो मीना कुमारी उनके युवा रूप को देखकर हैरान रह गईं। उनका सुझाव था कि यदि वे फिल्म का निर्देशन करेंगे तभी वह इस फिल्म में काम करेंगी।
उनकी फिल्म में आर.डी. बर्मन द्वारा संगीत दिया गया, जबकि मजरूह सुल्तानपुरी ने गीत लिखे। फिल्म में पहला गीत लता मंगेशकर की आवाज में था, और इसके बाद की शूटिंग में जिम्मेदारियों का बोझ सावन पर आ गया। फ्रेम में दिख रही उपस्थिति के बाद, मीना कुमारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिससे फिल्म की शूटिंग रुक गई।
वर्ष 1972 में इस फिल्म का रिलीज़ होना एक लंबे इंतज़ार के बाद था। इस दौरान, मीना कुमारी और सावन कुमार का रिश्ता धीरे-धीरे गहराने लगा। एक रात मीना ने सावन को अपने बेडरूम में बुलाया, जहां उन्होंने हंसते-हंसते कई कहानियाँ सुनाईं। स्थिति ऐसी थी कि सावन कुमार वहां रात बिताने के लिए भी रुक गए। अगली सुबह, उनकी बहन ने मजाक में सवाल किया कि उन्हें नींद आई या नहीं।
इसके बाद, सावन ने मीना को नियमित रूप से फूल भेजने शुरू कर दिए, खर्च के रूप में उन्होंने उस समय प्रति दिन तीन सौ रुपए खर्च किए। मीना को जापानी इकेबाना शैली में फूल सजाना बहुत पसंद था। लेकिन इस बीच, मीना कुमारी की सेहत लगातार बिगड़ रही थी। उन्हें लिवर सिरोसिस की बीमारी थी, जिसमें कई बार उन्हें खून की उल्टियाँ होती थीं। सावन ने हमेशा उनका समर्थन किया।
सावन ने मीना कुमारी से उनकी जिंदगी के बारे में भी गहराई से बातें की थीं। मीना ने उन्हें बताया था कि उनके पास अनेक प्रेम संबंध थे, लेकिन उनके सभी रिश्ते किताबों के समान थे। वे एक मानव की गहराई में उनके समर्पण को पहचानती थीं। मीना के शब्दों में, "तुम आखिरी किताब हो जिसे मैं पढ़ रही हूं।"
कई घटनाएँ बताती हैं कि मीना ने इस रिश्ते को बेहद गंभीरता से लिया। सावन ने एक बार बताया कि जब उनके पास पैसे खत्म हो गए थे, तब मीना ने उन्हें एक बड़ी रकम दी, जबकि उन्होंने यह जताया कि यह कोई दान नहीं है।
इस प्यार का एक अंश तब प्रकट हुआ जब मीना कुमारी की तबीयत दिन-ब-दिन deteriorate हो रही थी, फिर भी वह फिल्म की शूटिंग जारी रखना चाहती थीं। अंततः फिल्म की शूटिंग पूरी हुई और जब आखिरी शॉट लिया गया, तो सभी ने उनकी हिम्मत की सराहना की।
इस दौरान, जब मीना का जन्मदिन आया, तो सावन ने उसे धूमधाम से मनाने का फैसला किया। सेट पर फूलों की सजावट की गई और एक शानदार केक का इंतजाम किया गया। यह दृश्य सबके लिए एक अविस्मरणीय क्षण था।
लेकिन कुछ समय बाद, मीना कुमारी की तबियत और बिगड़ गई। सावन ने हमेशा उनके लिए हर संभव प्रयास किया, यहां तक कि एक बार उन्होंने अपनी कार बेचकर हॉस्पिटल का बिल चुकाया। इसके बावजूद, मीना कुमारी ने जिद की कि वे कभी उनसे दूर न जाएं।
उनके अंतिम क्षणों में, मीना ने सावन से कहा कि उन्हें पहली बार अपनी जिंदगी का प्यार मिला था। उन्होंने कहा, "जब मैं इस दुनिया से जा रही हूँ, तब मुझे फिर से इश्क मिला है। सावन, मुझसे दूर मत रहो।"
सावन ने मीना कुमारी की अंतिम यात्रा में भी भाग लिया और उनके जनाज़े को कंधा दिया। उनकी प्रेम कहानी आज भी उनके फैंस के दिलों में बसी हुई है। दोनों की सच्चाई, स्नेह और आत्मीयता की गहराई को दर्शाती है। यह कहानी आज भी रूहें छूने वाली है और हमेशा रहेगी।
टीम अम Rita Bazaar Patrika
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