राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का आंदोलन: सरकार को 18 सूत्रीय मांगों को लेकर चेतावनी
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का आंदोलन: सरकार को 18 सूत्रीय मांगों को लेकर चेतावनी
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कम शब्दों में कहें तो, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 7 फरवरी से अपना आंदोलन शुरू कर दिया है, जिसमें 13 जिलों में धरना-प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। कर्मचारियों ने सरकार को 18 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
देहरादून। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर 7 फरवरी से आंदोलन का द्वितीय चरण प्रारंभ हो गया। इस दौरान प्रदेश के 13 जनपद मुख्यालयों पर परिषद के तत्वावधान में धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न घटक संगठनों के कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की।
इस धरना कार्यक्रम में कर्मचारियों ने 18 सूत्रीय मांगों के संबंध में शासन-प्रशासन के प्रति अपना रोष व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र यथोचित कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
कर्मचारियों की मांगें
इस आंदोलन के दौरान विभिन्न जिलों में नेताओं ने अपने विचार रखे। पौड़ी में ग्राम विकास अधिकारी संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष हर्ष डी. जोशी ने कहा कि कर्मचारियों को 10, 16 एवं 26 वर्षों की सेवा पूर्ण करने पर प्रोन्नत वेतनमान नहीं दिया जा रहा है, जबकि मंत्रियों और विधायकों के वेतन एवं भत्तों में वृद्धि की जा रही है। यह स्पष्ट रूप से कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
टिहरी में जिलाध्यक्ष भगवान सिंह राणा ने कहा कि जब तक गोल्डन कार्ड में मौजूद विसंगतियों का समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक कर्मचारियों को इसका उचित लाभ नहीं मिल पाएगा। अल्मोड़ा में जिलाध्यक्ष उमापति पांडे ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि अन्य राज्य सरकारें पुरानी पेंशन योजना को लागू कर रही हैं, लेकिन उत्तराखंड सरकार इसे लागू करने में अनावश्यक रूप से हिचकिचा रही है।
वेतन विसंगतियों पर सवाल
उत्तरकाशी में जिलाध्यक्ष प्रकाश पंवार ने कहा कि सरकार वेतन विसंगतियों के समाधान के लिए समितियों का गठन करती है, लेकिन उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती, जिससे आम जनता के धन का दुरुपयोग हो रहा है। पिथौरागढ़ में जिलाध्यक्ष प्रदीप भट्ट ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से वाहन भत्ता मात्र 1200 रुपये है, जबकि इसका वृद्धि संबंधी प्रस्ताव वर्षों से वित्त सचिव के स्तर पर लंबित है।
भविष्य की योजनाएं
इस आंदोलन के तहत चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, हरिद्वार, चंपावत और नैनीताल सहित अन्य जनपदों में भी धरना कार्यक्रम आयोजित किया गया। सभी कर्मचारियों से 21 फरवरी 2026 को देहरादून में होने वाले एक दिवसीय धरना कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया गया है।
देहरादून के गांधी रोड स्थित दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय शाखा अध्यक्ष महिमा कुकरेती ने की। इस दौरान उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी को ज्ञापन सौंपते हुए परिषद के महामंत्री शक्ति प्रसाद भट्ट ने कहा कि यदि शासन समय रहते कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाता है, तो आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा, जिसकी सभी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
एकजुटता का संदेश
परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडे ने कहा कि आज का धरना कार्यक्रम पूरे प्रदेश में सफल रहा है, और सभी घटक संगठनों को एकजुट और संगठित रहने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करना सरकार के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
इससे पूर्व परिषद की शाखा पौड़ी और देहरादून की कार्यकारिणी का कार्यकाल पूर्ण होने के बाद नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। देहरादून से रविंद्र चौहान, विकास नेगी, पिंकेश रावत एवं प्रेमलता का चयन किया गया, जबकि पौड़ी से प्रदीप सुंदरियाल अध्यक्ष निर्वाचित हुए। कार्यक्रम में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।
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संपर्क करें: टीम अमृता बाजार पत्रिका - स्मिता शर्मा
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