वर्षा जल संचयन: भूजल संरक्षण के लिए विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सिफारिशें

May 24, 2026 - 21:44
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वर्षा जल संचयन: भूजल संरक्षण के लिए विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सिफारिशें
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वर्षा जल संचयन: भूजल संरक्षण के लिए विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सिफारिशें

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कम शब्दों में कहें तो, वर्षा जल संचयन के महत्व को समझते हुए विशेषज्ञों ने भूजल स्तर बढ़ाने के लिए सुझाव दिए हैं।

देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा शनिवार को आयोजित व्याख्यान में वर्षा जल संचयन के जरिए भूजल स्थिति को सुधारने पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम का आयोजन "मां धरा नमन" जल शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया था।

जल संरक्षण की आवश्यकता

यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि जल संकट की बढ़ती हुई चुनौती को देखते हुए हमें आज से ही गंभीर प्रयास करना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज जैसे मुद्दे केवल स्थायी विकास के लिए नहीं, बल्कि जीवनस्तर को भी बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

योजना का उद्देश्य

उल्लेखनीय है कि "मां धरा नमन" के तहत राज्यभर में जल शिक्षा कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और आम जनता को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. भवतोष शर्मा ने विषय विशेषज्ञ चंदन नयाल का परिचय देंते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

वर्षा जल संचयन का प्रभाव

विशेषज्ञ चंदन नयाल ने व्याख्यान में बताया कि पिछले 15 वर्षों में नैनीताल जनपद में 6,000 से अधिक संरचनाएं जैसे चाल, खाल, खंतियां और पोखरों का निर्माण किया गया है। इन प्रयासों से जल स्तर में सुधार हुआ है और जंगलों में आग लगने की घटनाओं में कमी आई है।

अन्य जानकारी

व्याख्यान के दौरान नयाल ने पारंपरिक जल विज्ञान, ग्रीष्मकाल में वर्षा जल से पोषित नदियों की स्थिति, कोसी जलागम क्षेत्र में भूजल प्रबंधन पर भी प्रकाश डाला। साथ ही, वर्षा जल संचयन के वैज्ञानिक पहलुओं पर भी विस्तृत जानकारी दी।

जल संचयन

कार्यक्रम में भागीदारी

इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों, मानसखंड साइंस सेंटर अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों, शिक्षण संस्थानों से छात्र-छात्राओं और विभिन्न प्रयोगशालाओं के कार्मिकों सहित 145 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह दर्शाता है कि जल संरक्षण की दिशा में समाज में जागरूकता बढ़ रही है।

निष्कर्ष

जल के अपर्याप्त संसाधनों को ध्यान में रखते हुए, ऐसे कार्यक्रम समाज में जल संरक्षण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भूजल संसाधनों को सहेजने के लिए सभी को आगे आना होगा।

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टीम अमृता बाजार पत्रिका - प्रिया शर्मा

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