विकसित भारत 2047: एक संकल्प, युवाओं की शक्ति और राष्ट्र निर्माण की दिशा में ठोस कदम
विकसित भारत 2047: एक संकल्प, युवाओं की शक्ति और राष्ट्र निर्माण की दिशा में ठोस कदम
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में 'विकसित भारत 2047' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की गई, जिससे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में नई ऊर्जा मिली।
देहरादून, 30 मई। शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में एक भव्य विचार संगोष्ठी 'विकसित भारत 2047' का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य भारत को स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना है। इस संगोष्ठी में समाज, शिक्षा, धर्म और राजनीति के विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों, युवाओं और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत और देश की जिम्मेदारियाँ
कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन और भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित करके किया गया। उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत' के संकल्प की बात करते हुए कहा कि 2047 तक भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारियों का समझदारी से निर्वहन करना होगा।
मुख्य वक्ता और उनकी बातें
मुख्य अतिथि, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा, "विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करके साकार होना चाहिए।" उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे नवाचार, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें।
भारत की सांस्कृतिक विरासत और तकनीकी विकास
संगोष्ठी में उपस्थित सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष, स्वामी रसिक महाराज ने भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और तकनीकी विकास के समन्वय को विकसित भारत की नींव बताया। उन्होंने कहा कि "गांवों, किसानों, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाए बिना, हम विकसित भारत का सपना नहीं देख सकते।"
मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट जैसे कई सम्माननीय व्यक्तियों ने भाग लिया। उन्होंने इस संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने और समाज में जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल सशक्तिकरण, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और सामाजिक एकता को विकसित भारत के प्रमुख स्तंभ बताया।
संगोष्ठी का महत्व और भविष्य की दिशा
आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार की चर्चा संगोष्ठियों का उद्देश्य राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। कार्यक्रम में कई प्रमुख शिक्षाविद और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे, जिनमें प्रोफेसर राजीव आहूजा (आईआईटी रोपर के निदेशक), प्रोफेसर प्रकाश सिंह (एच एन बी केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति) और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तित्व शामिल थे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
"विकसित भारत 2047 केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों का सामूहिक संकल्प है, जिसे जनभागीदारी और राष्ट्रभक्ति के माध्यम से अवश्य प्राप्त किया जाएगा।"
इस संकल्प को साकार करने के लिए, सभी नागरिकों को अपनी भूमिका निभानी होगी और एकजुट होकर काम करना होगा।
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सादर,
टीम अमृता बाज़ार पत्रिका
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