विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना: मजदूरों का हंगामा और ऐतिहासिक घेराव

Aug 16, 2026 - 21:44
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विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना: मजदूरों का हंगामा और ऐतिहासिक घेराव
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कम शब्दों में कहें तो, विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में एक गंभीर हादसे के बाद मजदूरों ने आक्रोशित होकर प्रदर्शन किया, जिसके चलते सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मुआवजे की मांगें जोर पकड़ चुकी हैं।

चमोली में तनावपूर्ण हालात

विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टेल रेस टनल में 13 अगस्त को हुए एक भयानक हादसे में आठ श्रमिकों की मृत्यु हो गई। इसके बाद मजदूरों और स्थानीय लोगों ने सोमवार को परियोजना स्थल पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और घायलों के इलाज के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

मुआवजा राशि पर उठे सवाल

टीएचडीसी (उत्तराखंड टीएचडीसी) द्वारा मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये और घायलों को एक लाख रुपये की अनुग्रह राशि का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे श्रमिकों और स्थानीय लोगों ने अपर्याप्त समझा। उन्होंने एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है और साथ ही मांग की है कि पीड़ित परिवारों में से किसी एक सदस्य को स्थायी नौकरी दी जाए।

प्रदर्शन के दौरान, आपदा मंत्री मदन कौशिक का घेराव किया गया और वहां उपस्थित सुरक्षा कर्मियों के साथ झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि यह दुर्घटना सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा है। उन्होंने सुरक्षा मानकों की कड़ी निगरानी और नियमित ऑडिट की मांग की है।

सुरक्षा मानकों के अनुपालन की आवश्यकता

कई श्रमिकों ने तर्क दिया कि सुरंग में काम करना अत्यंत जोखिम भरा है और उन्हें सुरक्षित कार्य वातावरण का अधिकार है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।

इस संबंध में, स्थानीय लोगों ने लिखा है कि किसी भी लापरवाही की जांच होनी चाहिए और यदि कोई जिम्मेदार पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रावधान बनाए जाने चाहिए।

श्रमिकों का भविष्य और जल विद्युत परियोजनाएं

स्थानीय लोगों ने टिप्पणी की है कि जल विद्युत परियोजनाओं से रोजगार और विकास के अवसर पैदा होते हैं, लेकिन यह सबकुछ श्रमिकों की सुरक्षा की कीमत पर नहीं होना चाहिए। प्रस्तावित मुआवजा राशि को लेकर उनकी चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने कहा है कि यह जरूरी है कि श्रमिकों को उनके श्रम का उचित मूल्य मिले।

प्रदर्शन में, कांग्रेस पार्टी ने भी न्याय की मांग की है। उनकी ओर से प्रदेश अध्यक्ष ने टीएचडीसी और राज्य सरकार से उचित मुआवजा देने की मांग की और सुरक्षा मानकों की प्रभावी जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

अन्ना की ओर से आई प्रतिक्रिया

स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, परियोजना क्षेत्र में मौजूद डंपिंग क्षेत्रों से प्राकृतिक जल प्रवाह में बाधा एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है। भौगोलिक परिवर्तनों के चलते जल प्रवाह में असामान्य परिवर्तन हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप सुरंगों में अधिक पानी का भराव हो गया था, जिससे यह हादसा हुआ।

हालांकि, अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि असली कारण क्या थे और इसके लिए एक विस्तृत जांच आवश्यक है। तात्कालिक तनाव और मुआवजे की मांगों के बीच, इस घटना ने जल विद्युत उद्योग की सुरक्षा नीतियों पर सवाल उठाए हैं और इसे ध्यान में रखकर अध्ययन की आवश्यकता है।

अंत में, प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और प्रभावित लोगों की मदद की जाएगी। हादसे के बाद एक उच्च-स्तरीय जांच टीम का गठन किया गया है, जो इस गंभीर मामले की गहराई से जांच करेगी।

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इस घटना की सूचना के बाद से ही टीएचडीसी और राज्य सरकार की नीतियों को पुनः अवलोकन और समीक्षा करने की आवश्यकता पाई जा रही है, ताकि भविष्य में श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रदर्शनकारियों के इस हंगामे ने उस समाज में एक गंभीर सवाल उठाया है, जो पीड़ितों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर चिंतित है। सबसे बड़ी बात यह है कि क्या हमारे श्रमिकों की जान और उनके अधिकारों का सम्मान किया जाएगा? इस मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

टीम अमृता बाजार पत्रिका
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