सीएम धामी की पहल: घेर-बाड़ योजना में फिर से मिली केंद्रीय सहायता, किसानों को मिलेगी राहत
सीएम धामी की पहल: घेर-बाड़ योजना में फिर से मिली केंद्रीय सहायता, किसानों को मिलेगी राहत
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने किसानों की फसल सुरक्षा के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय से घेर-बाड़ योजना के लिए 25 करोड़ रुपये की मदद हासिल की है। यह मदद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बातचीत के बाद उपलब्ध हुई है।
देहरादून। उत्तराखंड में किसानों की फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए राज्य सरकार के प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से हुई बातचीत के बाद घेर-बाड़ योजना को फिर से केंद्र से सहायता प्राप्त हुई है। हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने उपयुक्त योजना के तहत उत्तराखंड को 25 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की है।
उत्तराखंड में जंगली जानवरों से फसल को होने वाला नुकसान किसानों के लिए हमेशा से चिंता का विषय रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने घेर-बाड़ योजना को लागू किया था। इस योजना के तहत किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के लिए बाड़ लगाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। तीन साल पहले तक इस योजना के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय से सहयोग मिल रहा था, लेकिन उसके बाद यह सहायता बंद हो गई थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लगातार प्रयास किए कि इस योजना के लिए केंद्रीय मदद फिर से शुरू हो सके। उन्होंने जिला योजना के तहत घेर-बाड़ के लिए मदद देने की दिशा में भी पहल की। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान, कृषि मंत्री गणेश जोशी ने इस विषय पर जानकारी दी कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय से 25 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि हाल ही में गौचर में एक कार्यक्रम के दौरान इस समस्या को केंद्रीय मंत्री के सामने रखा गया था।
तीन वर्षों में फसल के लिए घेर-बाड़ योजना का विस्तार
राज्य सरकार ने सदन में यह जानकारी भी दी कि पिछले तीन वर्षों में जिला योजना से 2841 हेक्टेयर जमीन पर घेर-बाड़ की गई है, जिसके तहत 44,429 किसान लाभान्वित हुए हैं। कृषि मंत्री गणेश जोशी का यह भी कहना है कि इस बार के बजट में इस योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री धामी ने इस संबंध में काफी संवेदनशीलता दिखाई है।
यह सरकारी योजना किसानों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। केंद्र से मिली स्वीकृति निश्चित रूप से जंगली जानवरों के खिलाफ रक्षा कवच का काम करेगी। इससे न केवल किसानों को आर्थिक लाभ होगा, बल्कि कृषि पर निर्भर लोगों को भी राहत मिलेगी।
इस विषय पर जमीनी स्तर पर काम करने और किसानों को सही जानकारी देने के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह योजना किसानों के लिए परिणामदायी साबित हो और वे अपनी उम्र भर की मेहनत की फसल को सुरक्षित रख सकें।
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टीम अमृता बाजार पत्रिका
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