सीफा ने “ब्लू इकोनॉमी” के निर्माण में उठाए महत्वपूर्ण कदम

Mar 26, 2026 - 07:44
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सीफा ने “ब्लू इकोनॉमी” के निर्माण में उठाए महत्वपूर्ण कदम
सीफा ने “ब्लू इकोनॉमी” के निर्माण में उठाए महत्वपूर्ण कदम

सीफा ने “ब्लू इकोनॉमी” के निर्माण में उठाए महत्वपूर्ण कदम

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कम शब्दों में कहें तो, भुवनेश्वर में ICAR–Central Institute of Freshwater Aquaculture (CIFA) ने ब्लू इकोनॉमी की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनसे देश के मत्स्य पालन उद्योग को नई दिशा मिली है।

भुवनेश्वर (ओडिशा) — भुवनेश्वर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित CIFA परिसर में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकारों ने आधुनिक मत्स्य पालन पद्धतियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस अवसर पर वैज्ञानिकों ने यह बताया कि किस प्रकार मीठे जल में अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता की मछलियों का पालन किया जा रहा है। आधुनिक तकनीकों का उपयोग ओडिशा को देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्य के रूप में स्थापित करने में मदद कर रहा है।

संस्थान के निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार साहू ने बताया कि CIFA देश में ताजे पानी की मत्स्य पालन तकनीकों का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने उल्लेख किया कि संस्थान द्वारा विकसित की गई तकनीकें कम लागत में अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं, और इन्हें देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में आसानी से अपनाया जा सकता है।

इस दौरान, एक्वाकल्चर प्रोडक्शन एंड एनवायरमेंट के वैज्ञानिक डॉ. प्रताप चंद्र दास ने विशेष रूप से “चीतल मछली” के बारे में जानकारी दी। यह मछली अत्यंत स्वादिष्ट होती है और स्थानीय बाजार में इसकी कीमत लगभग ₹1600 प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है। चीतल मछली आमतौर पर 4 से 5 किलोग्राम तक की होती है, और इसमें कांटे अधिक होते हैं, फिर भी ओडिशा के लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। यह उच्च मूल्य वाली मछली राज्य के मत्स्य व्यवसाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

फिश न्यूट्रीशन से जुड़े पहलुओं पर शिव शंकर गिरी ने जानकारी दी कि संतुलित आहार और वैज्ञानिक प्रबंधन से मछलियों की गुणवत्ता, स्वाद और उत्पादन तीनों को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि CIFA द्वारा विकसित न्यूट्रीशन मॉडल किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर उत्पादन और आय की प्राप्ति हो रही है।

CIFA

इस अध्ययन दौरे के दौरान, पत्रकारों ने ब्लू इकोनॉमी और भारत की वैश्विक मत्स्य उत्पादन क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल भी उठाए। वैज्ञानिकों ने बताया कि यदि आधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षण को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए, तो भारत वैश्विक स्तर पर मछली उत्पादन और निर्यात में अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है।

इस अध्ययन दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू उत्तराखंड और ओडिशा के मत्स्य पालन मॉडलों का तुलनात्मक अध्ययन भी रहा। जहां ओडिशा में बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन किया जा रहा है, वहीं उत्तराखंड में ठंडे पानी की उच्च मूल्य वाली मछलियों, विशेषकर ट्राउट, के माध्यम से गुणवत्ता आधारित मत्स्य पालन तेजी से विकसित हो रहा है।

अंततः, यह अध्ययन दौरा पत्रकारों के लिए एक समृद्ध अनुभव साबित हुआ, जिसने उन्हें आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों से अवगत कराया और यह स्पष्ट किया कि भारत में ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। CIFA जैसे संस्थान इस दिशा में देश को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

ICAR–Central Institute of Freshwater Aquaculture (CIFA) में उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकारों के अध्ययन दल का दौरा ज्ञानवर्धक और अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। यह अध्ययन दौरा भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत Press Information Bureau (PIB) देहरादून द्वारा आयोजित किया गया। दल का नेतृत्व असिस्टेंट डायरेक्टर संजीव सुन्द्रियाल ने किया, जबकि PIB ओडिशा के असिस्टेंट डायरेक्टर मर्मेंद्र कुमार जेना भी उपस्थित रहे।

CIFA Visit

पत्रकारों के इस दौरे ने केवल उन्हें CIFA की नई तकनीकों से ही नहीं, बल्कि भारत की मछली उत्पादन क्षमता की बढ़ती संभावना के बारे में भी जागरूक किया। इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जागरूकता और तकनीकी सहयोग अत्यंत आवश्यक है।

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सादर,
टीम अमृता बजार पत्रिका
प्रियंका शर्मा

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