सुरेंद्र कोली की मौत: आत्महत्या या हत्या?

Sep 18, 2026 - 21:44
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सुरेंद्र कोली की मौत: आत्महत्या या हत्या?

सुरेंद्र कोली की मौत: आत्महत्या या हत्या?

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कम शब्दों में कहें तो, निठारी कांड के पूर्व आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत को लेकर उनके परिवार ने हत्या का आरोप लगाया है।

नोएडा। हरिद्वार में मिले शव के संदर्भ में निठारी कांड की पीड़िता के पिता ने कहा है कि सुरेंद्र कोली की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है। यह आरोप 2006 के निठारी हत्याकांड की एक पीड़ित 15 वर्षीय बच्ची के पिता, 64 वर्षीय झब्बू लाल ने लगाया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, झब्बू ने स्पष्ट रूप से कहा, "सुरेंद्र कोली की हत्या की गई है, उसने आत्महत्या नहीं की।" उनका कहना है कि सुरेंद्र कोली का नाम इस कांड से लगभग दो दशकों तक जुड़ा रहा है। वह शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में सप्त सरोवर रोड पर एक किराए के चाय के खोखे पर लटका हुआ पाया गया। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को मौके पर भेजा, जिसने प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या का मामला बताया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भी भेजा गया है।

हालांकि, झब्बू लाल ने यह सवाल उठाया कि जब सुरेंद्र कोली कई महीने जेल से बाहर थे, तो वह आत्महत्या क्यों करेगा? "अगर वह जेल में आत्महत्या करता, तो समझ आता कि वह अवसादित था। लेकिन रिहा होने के बाद आत्महत्या करना सवाल खड़े करता है। वह शायद कोई महत्वपूर्ण जानकारी उजागर करने वाला था, इसलिए उसकी हत्या की गई," उन्होंने कहा।

रिपोर्ट के अनुसार, झब्बू ने यह भी कहा कि कोली निठारी मामले का मुख्य अपराधी नहीं था, और उन्होंने प्रमुख आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ भी आवाज उठाई। "उसका मालिक मोनिंदर पंढेर ही इस मामले का मुख्य आरोपी है। उसे फांसी होनी चाहिए," झब्बू ने कहा।

इस घटनाक्रम ने पूरे देश में निठारी कांड की यादें ताजा कर दी हैं, जो कि भारत की सबसे भयानक आपराधिक घटनाओं में से एक है। पिछले कुछ वर्षों में, इस मामले पर कई धारावाहिक, डॉक्यूमेंट्री और रचनाएँ बनी हैं, जो न सिर्फ कांड को बल्कि न्याय प्रणाली की खामियों को भी उजागर करती हैं।

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इस प्रकार की घटनाएं न्याय के प्रति समाज की चिंताओं को और गहरा कर देती हैं। सवाल यह उठता है कि क्या हमारी न्याय प्रणाली सच में ऐसा निवारण कर सकती है, या हमें फिर से अन्याय का सामना करना होगा।

चुनौती यह है कि समाज कैसे इन मुद्दों पर ध्यान देता है और भविष्य में कैसे ऐसी घटनाओं को टाला जा सकता है।

टीम अम्रिता बाजार पत्रिका - राधिका मेहता

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