सेवारत शिक्षकों के टीईटी अनिवार्यता पर समाधान की जल्द उम्मीद: डा. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को दिए ठोस निर्देश
सेवारत शिक्षकों के टीईटी अनिवार्यता पर समाधान की जल्द उम्मीद
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कम शब्दों में कहें तो, विभागीय अधिकारियों को टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षक संगठनों से संवाद करने और सुसंगत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के मुद्दे का हल जल्द निकाला जाएगा। इसके लिए, प्रदेश के शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने आज शिक्षा निदेशालय में आयोजित समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।
टीईटी को लेकर ठोस दिशा-निर्देश
इस बैठक में डा. रावत ने कहा कि लगभग 20,000 शिक्षकों की यह गंभीर समस्या है, जो कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। जनवरी 2023 में प्रारंभ किए गए उपायों के अंतर्गत, विभागीय अधिकारी शिक्षकों संगठनों के साथ सकारात्मक वार्ता कर एक सुसंगत प्रस्ताव तैयार करेंगे। उन्होंने इस मुद्दे पर सभी पक्षों के विचार को ध्यान में रखने की बात कही, ताकि शिक्षा के मानकों को सुधार जा सके।
अन्य राज्यों का अध्ययन
डीजे के अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि वे अन्य राज्यों द्वारा टीईटी की अनिवार्यता से संबंधित निर्णयों का गहन अध्ययन करें और उनके अनुभवों के आधार पर रिपोर्ट भी प्रस्तुत करें। यह कार्य, वर्तमान स्थिति को समर्पित करते हुए, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के हित में समर्पित होगा।
शिक्षकों की पदोन्नति पर चर्चा
बैठक के दौरान, डा. रावत ने शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की। उन्होंने उच्च न्यायालय में लंबित याचिका के शीघ्र निस्तारण के लिए ठोस पैरवी करने का निर्देश दिया ताकि शिक्षकों को अपेक्षित पदोन्नति का लाभ समय पर मिल सके। इसके साथ ही, उन्होंने आगामी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) रैंकिंग में राज्य की स्थिति को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार
विद्यार्थियों की शिक्षा में गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए, डा. रावत ने नोडल अधिकारियों को विभिन्न गतिविधियों के आयोजन, शत-प्रतिशत साक्षरता को सुनिश्चित करने तथा 30 जून तक सभी स्तरों पर संवर्गों के अटैचमेंट को समाप्त करने के निर्देश दिए। इस दिशा में कार्य करना, शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाएगा और विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में सहायक होगा।
निष्कर्ष
शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत का यह निर्णय शिक्षकों की कठिनाइयों को समझते हुए लिया गया है, जिससे राज्य के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
फिर से कहते हैं, ताजा जानकारी और शिक्षा से संबंधित नीतियों पर अपडेट के लिए, नियमित रूप से हमारी वेबसाइट पर विजिट करें: Amrita Bazaar Patrika.
संपर्क: सुमन शर्मा, टीम अमृता बाजार पत्रिका
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