सैलजा की चुनौती के बावजूद हरीश रावत को मिला MLA और नेताओं का समर्थन

Oct 6, 2026 - 07:44
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सैलजा की चुनौती के बावजूद हरीश रावत को मिला MLA और नेताओं का समर्थन
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कम शब्दों में कहें तो, हरीश रावत ने सैलजा के आदेश को ठुकराते हुए कई विधायकों और नेताओं का सहयोग प्राप्त किया और जनसंवाद यात्रा के दौरान भाजपा के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई।

देहरादून। कांग्रेस हाईकमांड द्वारा कुमारी सैलजा को निर्देश दिया गया था कि वे पूर्व सीएम हरीश रावत से जनसंवाद यात्रा न करने के लिए कहें। लेकिन इससे उलट, हरीश रावत ने अपनी 'धन्यवाद जनसंवाद' यात्रा को जसपुर से हल्द्वानी तक बड़ी धूमधाम से मनाया। इस यात्रा में न केवल रावत, बल्कि कई विधायक और पूर्व विधायक भी शामिल हुए, जिन्होंने सैलजा की आक्रामक टिप्पणियों को नकारते हुए रावत का समर्थन किया।

किसने क्या कहा?

इस बार हरीश रावत ने अपनी यात्रा के दौरान कहा कि "जमीन से बदलाव-बदलाव की आवाज आ रही है"। उन्होंने 2029 में राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने का भी इशारा किया। रावत ने भाजपा पर भी कई गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि तराई क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से कोई कार्यक्रम नहीं हुआ।

हरीश रावत जनसंवाद यात्रा

सोमवार 5 अक्टूबर की सुबह जसपुर से प्रारंभ हुआ यह काफिला हल्द्वानी पहुंचा, जहाँ रावत के समर्थकों ने भाजपा को सत्ता से हटाने का संकल्प लिया। शुरुआत में यह माना जा रहा था कि सैलजा के पत्र के बाद अन्य नेता जनसंवाद यात्रा से दूर रहेंगे। लेकिन चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह की सक्रियता ने समीकरण को बदल दिया।

कांग्रेस के नेताओं का बढ़ता समर्थन

कांग्रेस के कई विधायक जैसे मदन बिष्ट, तिलकराज बेहड़, और आदेश चौहान ने भी रावत का साथ दिया। पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल और पूर्व विधायक हेमेश खरक्वाल भी यात्रा में शामिल हुए। सभी ने मिलकर हरीश रावत की मुहिम को बल देने का प्रयास किया।

कांग्रेस के नेता

सैलजा के पत्र में रावत को चेताया गया था कि वे बिना पार्टी के अनुमोदन के इस तरह के कार्यक्रम न करें। हालांकि, इस पत्र के बावजूद कई विधायक और पूर्व विधायक रावत के साथ खड़े रहे और प्रदेश की राजनीतिक स्थिति को बदलने की कोशिश की।

दिल्ली में संभावित वार्ता

अब हरीश रावत 7 और 8 अक्टूबर को दिल्ली में प्रभारी सैलजा और महासचिव केसी वेणुगोपाल से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस हाईकमांड इस समर्थन पर क्या कदम उठाएगा और क्या वे रावत के खिलाफ कोई कठोर निर्णय लेते हैं।

कांग्रेस के इस अंदरूनी संघर्ष में रावत ने एक बार फिर से एक प्रमुख नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरने की कोशिश की है। इस झगड़े में कौन सी दिशा स्पष्ट होती है, यह तो आगे देखने वाली बात होगी।

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आपका समर्थन महत्वपूर्ण है, और सभी नेताओं ने इस जनसंवाद यात्रा में भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया है।

- टीम अमृता बाजार पत्रिका, प्रियंका वर्मा

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