हनुमान मंदिर में जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा हटवाल गांव - सामूहिक उत्सव का आयोजन

Aug 19, 2026 - 00:44
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हनुमान मंदिर में जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा हटवाल गांव - सामूहिक उत्सव का आयोजन
हनुमान मंदिर में जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा हटवाल गांव - सामूहिक उत्सव का आयोजन

हनुमान मंदिर में जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा हटवाल गांव - सामूहिक उत्सव का आयोजन

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कम शब्दों में कहें तो, टिहरी गढ़वाल के हटवाल गांव में हनुमान मंदिर के परिसर में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर युवाओं ने पूजा-अर्चना के माध्यम से गांव की सुख-समृद्धि की कामना की, साथ ही मंदिर के आसपास की सफाई का कार्य भी किया।

सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का महत्व

18 अगस्त को, सकलाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत हटवाल में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों ने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल हटवाल ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन से युवाओं और बच्चों को हमारी सनातन संस्कृति, बोली-भाषा, और धार्मिक परंपराओं से जोड़ा जाना जरूरी है। अनिल ने कहा, "हनुमान चालीसा का नियमित पाठ केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि यह मन में शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।"

स्वच्छता अभियान का महत्व

इस दिन का उद्देश्य केवल धार्मिक था, बल्कि यह स्वच्छता अभियान के रूप में भी देखा गया। गांव के युवाओं ने मंदिर क्षेत्र की सफाई की। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि समाज में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी फैलाती है। यंगस्टर्स ने एक साथ मिलकर यह दिखाया कि समाज के हर सदस्य की जिम्मेदारी है कि वे अपने आस-पास की जगह को स्वच्छ बनाए रखें।

कार्यक्रम में शामिल लोग

इस अवसर पर कई स्थानीय लोग उपस्थित थे, जिनमें अर्जुन, महेश, कमान, प्रियाशी, सोनिका, नीतिन, आयुष, अंकित, अरुण, मीरा, गौरव, सारिका, ईशांत, दीपक, सौरभ, दिव्यांश जैसे युवा शामिल थे। इनकी उत्साही भागीदारी ने कार्यक्रम को और भी सफल बनाया।

सारांश

इस कार्यक्रम से यह संदेश मिलता है कि धार्मिक आचार-व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारियों का समन्वय आवश्यक है। उत्सवों का आयोजन सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी को हमारी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में मदद मिलती है।

अंत में, ऐसा आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामुदायिक विकास का प्रतीक भी है। इसके माध्यम से हम मिलजुलकर एक मजबूत तथा स्वच्छ समाज की नींव रख सकते हैं।

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सादर,
टीम अमरिता बाजार पत्रिका
— स्वाति शर्मा

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