हरिद्वार में सर्विस लेन पुलों का हाल: क्या है समस्या और समाधान?
हरिद्वार में सर्विस लेन पुलों का हाल: क्या है समस्या और समाधान?
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कम शब्दों में कहें तो, हरिद्वार में सर्विस लेन पुलों की अनुपस्थिति ने यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया है। पुलों की कमी के चलते न केवल स्थानीय निवासियों को बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
लेखक: डॉ. सुशील उपाध्याय
हरिद्वार, जिसे धर्म का शहर माना जाता है, में राष्ट्रीय राजमार्ग-334 (पुराना 58) शहर के मुख्य क्षेत्र से होकर गुजरता है। इस मार्ग के दोनों ओर जनसंख्या का पर्याप्त क्षेत्र है, लेकिन सर्विस लेन पुलों की अनुपस्थिति बड़े सवाल खड़े कर रही है।
कमी क्यों?
इस फोर-लेन हाईवे के कुछ हिस्सों में सर्विस लेन का निर्माण किया गया है, लेकिन इस बीच आने वाले पुल और अंडरपास को छोड़ दिया गया है। चंडी पुल की ओर जाने पर डैम कोठी से कनखल की ओर आने वाली जलधारा पर सर्विस लेन पुल का निर्माण नहीं किया गया। इस परिस्थिति में, ज्यादातर वाहन एक पुराने और जर्जर पुल का उपयोग कर रहे हैं, जो सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
अगर हम शंकराचार्य चौक से लेकर भूपतवाला एलिवेटेड रोड तक देखें तो यातायात की अत्यधिक भीड़ और जाम की स्थिति पैदा होती है। इस क्षेत्र में गंगा की विभिन्न धाराएं भी आ रहे हैं, जो स्थिति को और बिगाड़ देती हैं। सर्विस लेन को इस कारण अनदेखा किया जा रहा है।
स्थानीय यातायात पर प्रभाव
कई स्थानों पर, शहर के भीतर आने वाले वाहन मुख्य सड़क के बजाय सर्विस रोड का उपयोग कर रहे हैं। प्रेमनगर चौक के पास भी स्टेट की स्थिति लगभग वैसी ही है। यहां भी गंगनहर की ओर जाने वाली छोटी नहर पर कोई पुल नहीं बनाया गया है। यह स्थानीय यातायात के लिए और भी समस्याएं उत्पन्न कर रहा है, क्योंकि इसका एक तीखा मोड़ है जो अनजान ड्राइवर को परेशानी में डाल सकता है।
अगले वर्ष होने वाले कुंभ मेले के कारण, जब लाखों श्रद्धालु विभिन्न तिथियों में जल के लिए आएंगे, तब सर्विस रोड की उपयोगिता और भी बढ़ जाएगी। कुंभ प्रशासन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने हाल ही में बैठक की, लेकिन इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
क्या कहना है विशेषज्ञों का?
सर्विस लेन पुलों की तकनीकी और नीतिगत पहलुओं पर चर्चा जरूरी है। क्या वास्तव में इन पुलों का निर्माण योजना में शामिल था? यदि हाँ, तो इन्हें अधूरा क्यों छोड़ दिया गया है? जहां बुनियादी ढांचे के अवरोध हैं, वहां सर्विस लेन की निरंतरता सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है?
हो सकता है कि इन मुद्दों पर किसी प्रकार की स्पष्टता की आवश्यकता है। ये तकनीकी कमियों के साथ-साथ नीतिगत त्रुटियों को भी उजागर करते हैं। वे स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ा सुरक्षा खतरा बनते जा रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएं
हरिद्वार का क्षेत्र विशेष रूप से कांवड़ यात्रा और कुंभ जैसे आयोजनों के समय यातायात दबाव का सामना करता है। यह स्पष्ट है कि यहां सर्विस लेन पुलों की आवश्यकता तत्काल है, ताकि संकट के समय में स्थानीय लोग सुरक्षित रह सकें। इसके अलावा, भविष्य के यातायात का आकलन भी आवश्यक है, ताकि इस प्रकार की स्थिति दोबारा न हो।
स्थानीय प्रशासन और नेशनल हाईवे प्राधिकरण को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान दें और जल्द से जल्द समाधान तय करें। पुलों की अनुपस्थिति को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि हरिद्वार के विकास में सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाए।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया हमारी वेबसाइट Amrita Bazaar Patrika पर जाएं।
विज्ञप्ति: इस विषय पर अपनी राय और विचार साझा करें, ताकि हम मिलकर समस्याओं को हल कर सकें।
सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका,
संगीत श्रीवास्तव
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