हिमालय: आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक चेतना का आधार - मुख्यमंत्री का बयान

Sep 15, 2026 - 00:44
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हिमालय: आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक चेतना का आधार - मुख्यमंत्री का बयान

हिमालय: आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक चेतना का आधार - मुख्यमंत्री का बयान

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदी दिवस के अवसर पर ‘हिमालयन संस्कृति‘ पत्रिका का विमोचन करते हुए हिमालय को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न हिस्सा बताया।

देहरादून। हिंदी दिवस के अवसर पर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में प्रमुख सेवक सदन में हिमालयी संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन को समर्पित पत्रिका ‘हिमालयन संस्कृति‘ के प्रवेशांक का विमोचन किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि यह पत्रिका हिमालयी राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक आस्थाओं, रीति-रिवाजों, लोक कला, साहित्य, इतिहास, विरासत और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।

हिमालय: केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि “हिमालय सिर्फ एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है।” उन्होंने अपनी बात में जोड़ते हुए कहा कि “हिमालयीय लोक परंपराओं और विरासत का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यह विशेषांक हिमालयी समाज की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का संदर्भ-स्रोत बनेगा और संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ हिमालयी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा देगा।”

कौशल और परंपराओं का संरक्षण

पत्रिका के संपादक, श्री रजनीश कौंसवाल ने बताया कि यह विशेषांक हिमालयी संस्कृति के विविध पहलुओं को एक मंच पर लाएगा। इसमें हिमालय की लोक स्मृतियों, पारंपरिक ज्ञान, लोक कलाओं, सामाजिक जनसरोकारों और पर्यावरणीय चेतना को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने का उल्लेखनीय प्रयास किया गया है।

इस अवसर पर रायपुर विधायक उमेश शर्मा (काऊ), भाजपा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल, विनोद खंडूरी, बद्री केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष श्री प्रसाद सती, सदस्य राजपाल जड़धारी, विपिन और वरिष्ठ पत्रकार हरीश कोठारी जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने इस अभिनव पहल के लिए संपादक रजनीश कौंसवाल को शुभकामनाएं दीं।

इस प्रकार, हिमालय की अद्वितीय सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण करना न केवल वर्तमान पीढ़ी का कर्तव्य है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अनिवार्य है।

हिमालय का यह विशेषांक न सिर्फ संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का भी एक माध्यम है।

इस विशेषांक के माध्यम से हम आशा करते हैं कि युवा पीढ़ी हिमालय की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान से परिचित हो सकेगी।

हिमालयन संस्कृति पत्रिका का विमोचन न केवल सांस्कृतिक संरक्षण का एक कार्यक्रम है, बल्कि यह भारत की समृद्ध विरासत को सलाम देने का एक जश्न भी है।

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Team Amrita Bazaar Patrika

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