अस्पतालों की लापरवाही: बिना जरूरत आईसीयू में भर्ती, अवैध वसूली का मामला
अस्पतालों की लापरवाही: बिना जरूरत आईसीयू में भर्ती, अवैध वसूली का मामला
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कम शब्दों में कहें तो, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की छापेमारी में कई निजी अस्पतालों की अनियमितताएं उजागर हुई हैं। आयुष्मान योजना के अंतर्गत कई अस्पतालों में बिना आवश्यकता के मरीजों को आईसीयू में भर्ती किया जा रहा है, अवैध वसूली की जा रही है और कई डॉक्टर गायब हैं।
देहरादून। मंगलवार को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) ने देहरादून स्थित कुछ निजी अस्पतालों पर एक छापेमारी की, जिसने अस्पतालों में गंभीर अनियमितताओं की पोल खोल दी। इस छापेमारी से जुड़े डॉ. सरोज नैथानी के नेतृत्व में अधिकारियों ने कई अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान पावरलाइफ, प्रेमसुख, प्रकाशदीप, वेलमेड और सुनंदा मेडिकल सेंटर अस्पतालों में अवैध वसूली, अनावश्यक रोगी भर्ती, डॉक्टरों की अनुपस्थिति, खराब दवाई, और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसी गंभीर खामियां पाई गईं।
अवशेष अस्पतालों की स्थिति
सीधे तौर पर अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए गए इन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्रकाशदीप और पावरलाइफ अस्पतालों की आयुष्मान योजना के अंतर्गत डायलिसिस यूनिट की संबद्धता निलंबित कर दी गई है, वहीं प्रेमसुख और सुनंदा अस्पताल पर आर्थिक दंड लगाने की संस्तुति की गई है। इसके अलावा इन सभी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।
पावरलाइफ अस्पताल में अनावश्यक भर्ती
पावरलाइफ अस्पताल के निरीक्षण में पाया गया कि यहां कोई सामान्य वार्ड उपलब्ध नहीं था। हाल ही में एक मरीज को घबराहट और उल्टी की समस्या के चलते अनावश्यक रूप से आईसीयू में भर्ती किया गया था। इसके साथ ही, अस्पताल में न तो टोल फ्री नंबर था और न ही स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध थी, जो मरीजों के लिए जरूरी है।
प्रेमसुख अस्पताल में अवैध वसूली
प्रेमसुख अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों से 48,000 रुपये की मांग की गई थी। कई खामियों का पता चला जैसे प्री-आथराइजेशन में देरी और अग्नि सुरक्षा का अभाव। इससे स्पष्ट है कि अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं है।
प्रकाशदीप अस्पताल की लापरवाही
प्रकाशदीप अस्पताल से संबंधित मरीजों ने दुर्भाग्यपूर्ण हालत का जिक्र किया। यहां से 85,000 रुपये तक वसूली की जा रही थी और निरीक्षण के दौरान कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। ऐसी स्थिति में मरीजों की देखभाल केवल नर्सिंग स्टाफ पर निर्भर हो जाती है, जिससे उनके स्वास्थ्य को खतरा होता है।
सुनंदा मेडिकल सेंटर में गंभीर खामियां
सुनंदा मेडिकल सेंटर की डायलिसिस यूनिट की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां वेंटिलेशन और अग्नि निकास मार्ग का अभाव था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डायलिसिस करवा रहे मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड भी सही तरीके से रखे नहीं गए।
वेलमेड अस्पताल का हाल
वेलमेड अस्पताल में भी कमियां पाई गईं। यहाँ जन जागरूकता सामग्री का अभाव और केवल एक आरओ प्लांट ही संचालित मिला। इन खामियों ने यह साबित किया है कि अस्पताल प्रबंधन अपने मरीजों को उचित सुविधाएं और देखभाल प्रदान करने में असफल है।
इस छापेमारी से स्पष्ट है कि राज्य के अस्पतालों में गंभीर अनियमितताओं की स्थिति है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है। इसकी गंभीरता को देखते हुए उपायों की आवश्यकता है ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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सही समय पर उचित कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके।
सादर, टीम अमृता बाजार पत्रिका - प्रियंका शर्मा
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