आयुष्मान योजना में गड़बड़ी: उत्तराखंड के तीन अस्पतालों की संबद्धता निलंबित
आयुष्मान योजना में गड़बड़ी: उत्तराखंड के तीन अस्पतालों की संबद्धता निलंबित
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कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत तीन अस्पतालों को गंभीर खामियों के चलते निलंबित किया गया है। इनमें कैशलेस इलाज से इनकार, अवैध वसूली और गुणवत्ता मानकों में कमी जैसे मुद्दे शामिल हैं।
हाल ही में, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) उत्तराखंड ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के अंतर्गत बरेली स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज, देहरादून के ओजस्वी और अरिहंत अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को सुधारने के लिए लागू की गई योजनाओं में खामियों की पहचान करने की इस पहल को अहम माना जा रहा है।
एसआरएमएस और अन्य अस्पतालों पर गिरी गाज
जानकारी के अनुसार, इन अस्पतालों ने सरकारी रेफरल मरीजों को भर्ती करने से मना कर दिया था। इसके अलावा, कैशलेस इलाज में भी कई गंभीर खामियां पाई गईं। बरेली स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज पर इन मुद्दों के चलते गंभीर कार्रवाई की गई है।
एक अन्य मामले में, चंपावत जिले का एक मरीज, जिसे उप जिला चिकित्सालय टनकपुर से रेफर किया गया था, को भर्ती नहीं किया गया। मरीजों के बीच चिकित्सा की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों में गंभीर खामियां पाई गई हैं। एक फिर से नैनीताल निवासी महेंद्र सिंह ने शिकायत की कि उनके पिता से पीएम-जेएवाई के तहत भर्ती होने के बावजूद 1.44 लाख रुपये की भृश्ताचारपूर्ण वसूली की गई।
ओजस्वी और अरिहंत अस्पताल की स्थिति
देहरादून का ओजस्वी अस्पताल भी इस कार्रवाई से बच नहीं सका। अस्पताल पर 12 हजार रुपये की अवैध वसूली का आरोप लगा। इस व्यापारिक जांच में यह पाया गया कि अस्पताल ने नियमों का उल्लंघन कर कैशलेस उपचार का मना किया था। इस पर अस्पताल को 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
अरिहंत अस्पताल की स्थिति भी गंभीर मानी गई। यहां डायलिसिस यूनिट और संक्रमण नियंत्रण में पूरे तरीके से खामियां पाई गईं। डायलिसिस बेड के बीच की दूरी भी मानकों के अनुरूप नहीं थी और अस्पताल में न तो चिकित्सा पर्यवेक्षण का कोई दस्तावेज मिला, न ही संक्रमण नियंत्रण के मानक पालन का कोई प्रमाण।
बलूनी अस्पताल पर कार्रवाई
बलूनी अस्पताल पर भी कार्रवाई की गई, जिसमें 86,250 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बताया गया है कि अस्पताल ने एक पीएम-जेएवाई लाभार्थी से दवाइयों और डायग्नोस्टिक जांच के नाम पर अवैध वसूली की थी। अस्पताल की आर्थिक अनियमितताओं और चिकित्सा मानकों की कमी भी इससे स्पष्ट होती है।
निष्कर्ष
इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण अपने दायित्वों को निभाने में गंभीर है और वह अस्पतालों में गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने में कोई कोताही नहीं बरतेगा। यह स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, जिससे अन्य अस्पताल भी जागरूक हो सकते हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता बनाए रखना न केवल सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि अस्पतालों की भी है। सभी अस्पतालों को अपनी व्यवस्थाओं में सुधार लाने की आवश्यकता है ताकि वे उचित चिकित्सा सेवाओं प्रदान कर सकें।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया Amrita Bazaar Patrika पर जाएं।
संपादित: स्नेहा शर्मा, टीम अमृत बाजार पत्रिका
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