कंचन देवराड़ी: शिक्षा निदेशक के रूप में अद्वितीय कार्यकाल का समापन

May 1, 2026 - 07:44
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कंचन देवराड़ी: शिक्षा निदेशक के रूप में अद्वितीय कार्यकाल का समापन
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कंचन देवराड़ी: शिक्षा निदेशक के रूप में अद्वितीय कार्यकाल का समापन

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कम शब्दों में कहें तो, कंचन देवराड़ी ने अपने विशेष कार्यकाल के बाद शिक्षा निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया है। उनकी विदाई के संदर्भ में शिक्षा मंत्री ने उनकी सेवा एवं उपलब्धियों की सराहना की।

देहरादून। उत्तराखंड की बेसिक और संस्कृत शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए, कंचन देवराड़ी ने 30 अप्रैल, शुक्रवार को सेवानिवृत्त होने की घोषणा की। उनके विदाई समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उनकी दीर्घ एवं उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना की।

शिक्षा मंत्री की प्रशंसा

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कंचन देवराड़ी की सेवाओं को स्मरणीय बताया और उनके योगदान को आगामी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। रावत ने उनके समर्पण को सराहा और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

रणनीतिक सुधारों में योगदान

कंचन देवराड़ी ने शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत 1990 में की थी। इसके बाद उन्होंने 1997 में लोक सेवा आयोग के माध्यम से विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया जिनमें प्रधानाचार्य, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी जैसे प्रमुख पद शामिल हैं। उनके कार्यकाल के दौरान शिक्षा प्रशासन में दक्षता, पारदर्शिता, और गुणवत्ता सुधार हेतु महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।

शिक्षा एवं व्यावसायिक पृष्ठभूमि

कंचन का जन्म 30 अप्रैल 1966 को टिहरी गढ़वाल के देवप्रयाग में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गृहनगर में प्राप्त की, जिसके पश्चात उन्होंने उच्च शिक्षा एम.के.पी. महाविद्यालय से अंग्रेजी में की और बी.एड. तथा एम.एड. की डिग्री भी प्राप्त की। इसके अलावा, वह शिक्षा शास्त्र में पीएच.डी. के लिए अध्ययनरत हैं।

परिवार का समर्थन

कंचन का परिवार भी शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय है। उनके पति, डी.पी. देवराड़ी, पंचायती राज में सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक हैं। उनके बच्चे भी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पढ़ाई और कैरियर बना रहे हैं, जैसे कि उनके पुत्र अमित देवराड़ी पशु चिकित्सक हैं और उनकी बेटी गौरी देवराड़ी चिकित्सा स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं।

आगामी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत

विदाई समारोह में शिक्षा मंत्री ने कहा कि कंचन देवराड़ी की उत्कृष्ट सेवाएँ हमेशा याद रखी जाएँगी। उनके अनुभव और उनके द्वारा स्थापित मानदंड आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनेंगी। शिक्षा विभाग उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके योगदानों को याद रखेगा।

कंचन देवराड़ी का विदाई समारोह न केवल एक अध्याय का समापन था, बल्कि यह उनकी उपलब्धियों और शिक्षा के प्रति उनके अटूट समर्पण का प्रतीक भी था।

इसके अलावा, उनकी विदाई पर शिक्षा विभाग ने एक भावभीनी विदाई समारोह का आयोजन किया, जिसमें अधिकारियों ने कंचन देवी के उत्कृष्ट कार्यों की प्रशंसा की और उनके सुखद भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर उन्होंने जोर देकर कहा कि “हमारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए हमें समर्पित रहना होगा। यह कार्य अब नई पीढ़ी के हाथों में है कि वे हमारे द्वारा बनाए गए ढांचे को और मजबूत बनाएं।”

बातचीत के बीच में कंचन ने सुझाव दिया कि शिक्षकों को हमेशा समय के साथ चलना चाहिए और छात्रों की आवश्यकताओं के अनुसार खुद को तैयार रखना चाहिए।

उनके कार्यकाल के काबिल का एक प्रमुख उदाहरण कुछ अधिकारी भी दिए गए। उनके कार्यांकन में रचनात्मकता और नवीनता उनके नेतृत्व का एक अभिन्न हिस्सा था।

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Team Amrita Bazaar Patrika - राधिका शर्मा

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