गैरसैंण आंदोलन का निर्णायक एलान: पूर्व IAS विनोद रतूड़ी ने काले झंडों के साथ उठाया सिर
गैरसैंण आंदोलन का निर्णायक एलान: पूर्व IAS विनोद रतूड़ी ने काले झंडों के साथ उठाया सिर
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण पर चल रहे आंदोलन ने अब एक नई दिशा ले ली है। पूर्व IAS अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी ने एक बार फिर से राज्य की सत्ता के खिलाफ आम जनता को संगठित करने का ऐलान किया है।
टिहरी गढ़वाल से आई इस सूचना के अनुसार, पूर्व IAS अधिकारी विनोद रतूड़ी ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए एक निर्णायक आंदोलन का औपचारिक एलान किया है। यह आंदोलन मुख्यतः भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाने के लिए तैयार हो रहा है।
गैरसैंण के समर्थन में रतूड़ी की सक्रियता
विनोद प्रसाद रतूड़ी, जिन्होंने अपने प्रशासनिक करियर के दौरान गैरसैंण के समर्थन में RTI दाखिल करके अपनी दृढ़ता का परिचय दिया है, अब सेवा निवृत्ति के बाद इस संघर्ष को एक जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि रुद्रप्रयाग में होने वाले विशाल आंदोलन में काले झंडे दिखाकर सत्ता प्रतिष्ठान को चुनौती दी जाएगी।
निर्णायक कदमों का संचालन
रतूड़ी ने कहा है कि इसके बाद देहरादून में विधानसभा या सचिवालय के बाहर क्रमिक अनशन भी किया जाएगा। उनका मानना है कि यह आंदोलन स्थायी राजधानी के मुद्दे को एक निर्णायक मोड़ पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने पहाड़ की लोक परंपरा का उदाहरण देते हुए कहा कि अब यह आंदोलन सरकार को जगाने के लिए कठोर कदम उठाने की जरूरत है।
गांव-गांव में जन जागरूकता अभियान
इससे पहले, रतूड़ी ने कई महीनों से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का कार्य किया है। उन्होंने जनता को इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की है और इसे माननीय उच्च न्यायालय तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका मकसद है कि मंत्रियों और सांसदों से इस विषय पर सीधे जवाब मांगा जाए।
आंदोलन की भावनाएँ
रेटायरमेंट के बाद भी, रतूड़ी ने अपने विचारों को स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन उन 42 अमर आंदोलनकारियों और बाबा मोहन सिंह रावत 'उत्तराखंडी' के बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने दो टूक कहा, "न हम दबेंगे, न डरेंगे और न ही रुकेंगे। जब तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिल जाता, यह मशाल बुझने वाली नहीं है।"
सामाजिक एकता का दीदार
इस निर्णायक संघर्ष में प्रदेश के महिलाएं और आम जनता उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हो गई हैं। भुवन चंद्र जुयाल, गोपाल दत्त कुमेडी, बलबीर सिंह, दान सिंह मिंगवाल और राज किशोर बिष्ट जैसे प्रमुख नेता भी इस आंदोलन में शामिल हुए हैं, जो इसे और भी मजबूत बनाएंगे।
गैरसैंण की हुंकार अब सड़कों से अदालतों तक गूंजने के लिए तैयार हो रही है। यह संघर्ष प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने की क्षमता रखता है।
इसके अलावा, इस विषय पर और अपडेट के लिए यहां क्लिक करें.
सच्चे समर्पण के साथ, Team Amrita Bazaar Patrika
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0