बिजली की कमी से जूझ रहा है ऊर्जा प्रदेश उत्तराखण्ड

Sep 24, 2026 - 21:44
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बिजली की कमी से जूझ रहा है ऊर्जा प्रदेश उत्तराखण्ड

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जलविद्युत उत्पादन घटा, पीक आवर्स में बढ़ी मांग

उत्तराखण्ड में 350 मेगावाट बिजली की कमी

एक्सचेंज से बिजली खरीदने के प्रयास तेज

रोस्टरिंग न्यूनतम रखने में जुटा UPCL

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। ऊर्जा प्रदेश में बिजली संकट बरकरार है। जलविद्युत उत्पादन में कमी और पीक आवर्स में बढ़ती मांग के कारण उत्तराखंड में फिलहाल औसतन करीब 350 मेगावाट बिजली की कमी बनी हुई है।
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) रोस्टरिंग को न्यूनतम रखने के लिए उपलब्ध सभी विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है।

UPCL के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने गुरुवार को मौजूदा विद्युत संकट के कारणों और आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के प्रयासों की जानकारी दी।
प्रबंध निदेशक ने बताया कि सितंबर में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) के उत्पादन में करीब 170 मेगावाट की कमी आई है।

सितंबर 2025 में पीक आवर्स के दौरान UJVNL का औसत उत्पादन करीब 1094 मेगावाट था, जो इस वर्ष घटकर करीब 912 मेगावाट रह गया है। केंद्रीय जलविद्युत परियोजनाओं से भी करीब 90 मेगावाट कम बिजली मिल रही है।
इसके अलावा टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां तकनीकी कारणों से उपलब्ध नहीं हैं। इससे पीक आवर्स में करीब 100 मेगावाट बिजली की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। इन परिस्थितियों के चलते पीक आवर्स में प्रदेश में करीब 350 मेगावाट बिजली की कमी बनी हुई है, जिसके कारण सीमित और नियंत्रित रोस्टरिंग करनी पड़ रही है।

पीक आवर्स में एक्सचेंज से बिजली महंगी

UPCL के मुताबिक बिजली संकट केवल स्थानीय उत्पादन में कमी तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर भी शाम और रात के पीक आवर्स में बिजली की उपलब्धता सीमित रहती है। दिन में सौर ऊर्जा की उपलब्धता के दौरान एक्सचेंज में बिजली अपेक्षाकृत पर्याप्त और सस्ती रहती है, जबकि शाम और रात में मांग बढ़ने पर इसकी कीमत काफी बढ़ जाती है। इसके बावजूद UPCL रोस्टरिंग कम रखने के लिए एक्सचेंज से बिजली खरीदने के लगातार प्रयास कर रहा है।


फर्नेस के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टरिंग

आपातकालीन रोस्टरिंग के लिए प्राथमिकता तय की गई है। पहले कुमाऊं और गढ़वाल के फर्नेस/स्टील फर्नेस क्षेत्रों में रोस्टरिंग की जा रही है। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार ग्रामीण कुमाऊं और गढ़वाल तथा फिर छोटे नगरों में रोस्टरिंग की जा रही है।

एमडी पीसी ध्यानी मीडिया से मुखातिब

UPCL के अनुसार रोस्टरिंग का उद्देश्य आपूर्ति बाधित करना नहीं, बल्कि सीमित बिजली का संतुलित उपयोग करते हुए अधिकतम उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराना है।
फील्ड इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित रखरखाव के कार्य संभव हो तो रोस्टरिंग अवधि में किए जाएं अथवा जरूरत पड़ने पर स्थगित किए जाएं, ताकि सामान्य आपूर्ति के दौरान अनावश्यक व्यवधान न हो।
पीक आवर्स में हाइड्रो जनरेटरों को अधिकतम संभव सीमा तक चलाने और सौर ऊर्जा उपलब्ध रहने के दौरान तकनीकी रूप से संभव सीमा तक जलविद्युत उत्पादन कम रखने की रणनीति अपनाई जा रही है। इससे उपलब्ध जल संसाधनों का इस्तेमाल अधिक मांग वाले समय में किया जा सकेगा।


UPCL प्रबंधन ने फील्ड अधिकारियों को रोस्टरिंग के दौरान उपभोक्ताओं की शिकायतों का प्राथमिकता से निस्तारण करने और बिजली आपूर्ति की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों और कर्मचारियों से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करने को कहा गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में निदेशक (वितरण एवं परियोजना), कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) समेत UPCL के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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