हिंदी साहित्य में शोध की प्रक्रिया और संभावनाओं पर विशेष व्याख्यान का आयोजन
हिंदी साहित्य में शोध की प्रक्रिया और संभावनाओं पर विशेष व्याख्यान का आयोजन
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कम शब्दों में कहें तो, श्रीनगर गढ़वाल स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने हिंदी साहित्य में शोध की प्रक्रिया और संभावनाओं पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम ने शोध के क्षेत्र में नई दृष्टि और सृजनात्मकता को उजागर किया।
श्रीनगर गढ़वाल, 31 अगस्त 2025। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग द्वारा 30 अगस्त 2025 को “हिंदी साहित्य में शोध की प्रविधि, प्रक्रिया एवं संभावनाएं” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं पौड़ी परिसर के पूर्व निदेशक प्रोफेसर श्यामधर तिवारी उपस्थित रहे।
प्रोफेसर तिवारी का स्वागत
इस कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार ने पुष्पगुच्छ एवं शॉल पहनाकर प्रोफेसर तिवारी का स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने प्रोफेसर तिवारी की विश्वविद्यालय में 45 वर्षों की अमूल्य सेवाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर तिवारी के मार्गदर्शन में अनेक विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने अपने जीवन को नई दिशा प्रदान की।
शोध की प्रक्रिया पर प्रोफेसर तिवारी का उद्बोधन
अपने उद्बोधन में प्रो. तिवारी ने कहा कि हिंदी साहित्य में शोध केवल तथ्यों का संकलन नहीं है, बल्कि यह एक सृजनात्मक और आलोचनात्मक दृष्टि है। उन्होंने शोध में प्राथमिक और द्वितीयक स्रोतों के महत्व, ग्रंथ-परीक्षण, परंपरा और नवीनता के संतुलन पर स्पष्टता प्रदान की। प्रोफेसर तिवारी ने यह भी कहा कि शोधार्थियों को साहित्यिक परिप्रेक्ष्य के साथ-साथ सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों पर भी गहन दृष्टि रखनी चाहिए।
डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग और अंतरविषयक दृष्टिकोणों को भी उन्होंने आधुनिक शोध में नई संभावनाओं के रूप में रेखांकित किया। उनका यह विचार शोधकर्ताओं के लिए एक प्रेरणास्रोत साबित हो सकता है, जिससे वे अपनी शोध की दिशा को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकें।
समापन भाषण और कार्यक्रम की सार्थकता
धन्यवाद भाषण में प्रोफेसर मंजुला राणा ने प्रोफेसर तिवारी के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने अथक परिश्रम से हिंदी विभाग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इस कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों ने उनकी प्रशंसा की और उनका ज्ञानवर्धक उदबोधन विश्वविद्यालय के शोध छात्र-छात्राओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम में डॉ. अनूप सेमवाल, डॉ. कपिल देव पंवार, डॉ. सविता मैठाणी सहित अनेक शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थिति रहे। कार्यक्रम का संचालन शुभम थपलियाल ने किया। यह व्याख्यान हिंदी साहित्य के शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बना, जिसमें शोध की बारीकियों और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस घटना का महत्व हिंदी साहित्य में शोधकर्ताओं के लिए एक नई दृष्टि का रास्ता खोलता है, जिससे वे अपनी शोध कार्यों को न केवल सृजनात्मकता के साथ आगे बढ़ा सकें, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकी जानकारी और अध्ययन विधियों के ज्ञान से भी समृद्ध किया जा सके।
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सादर,
टीम अमrita बाजार पत्रिका, स्वाति शर्मा
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