21 साल से हक की जंग, पुनर्वास के लिए भटक रहे बांध प्रभावित

Sep 29, 2026 - 00:44
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21 साल से हक की जंग, पुनर्वास के लिए भटक रहे बांध प्रभावित

पडागली के पांच परिवारों की पूरी जमीन झील में समाई, राजस्व रिकॉर्ड में टीएचडीसी का नाम दर्ज; अब डीएम ने तलब की पत्रावली

टिहरी गढ़वाल । टिहरी बांध परियोजना के लिए जमीन गंवाने के बाद भी कुछ प्रभावित परिवारों को अपने हक के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पडागली के पांडुनामे तोक के पांच परिवारों की पूरी जमीन वर्ष 2005 में टिहरी बांध की झील में समा गई, जमीन राजस्व अभिलेखों में टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के नाम दर्ज हो गई, लेकिन 21 साल बाद भी इन परिवारों को पुनर्वास सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सका।

भिलंगना ब्लॉक के ग्राम पडागली निवासी बांध प्रभावित सुरजा देवी ने जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में मामले को उठाते हुए कहा कि उनके सहित पांच परिवारों की संपूर्ण भूमि अक्तूबर 2005 में बांध की झील में डूब गई थी। परियोजना के चलते जमीन हाथ से जाने के बावजूद प्रभावित परिवारों की पात्रता का निर्धारण आज तक नहीं हो पाया है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रभावितों की जमीन परियोजना के नाम दर्ज हो चुकी है और उसी क्षेत्र के अन्य प्रभावित परिवारों को पुनर्वास पैकेज, कृषि एवं आवासीय भूखंड तथा प्रतिकर तक मिल चुका है, तो इन परिवारों को उनके अधिकारों से अब तक क्यों वंचित रखा गया?
प्रभावितों के अनुसार पांडुनामे तोक के अन्य पांच परिवारों की भूमि भी टिहरी बांध की झील में डूबी थी। उन्हें कृषि एवं आवासीय भूखंड के साथ प्रतिकर का भुगतान भी किया जा चुका है। दूसरी ओर बालम सिंह, रणवीर सिंह, गुमान सिंह, शरण सिंह, पूनम देवी और राहुल समेत अन्य प्रभावित परिवार वर्षों से अपने हक के लिए पुनर्वास निदेशालय के चक्कर काट रहे हैं।
डीएम ने तलब की पत्रावली
21 साल पुराने इस प्रकरण का अब तक निस्तारण नहीं होने पर जिलाधिकारी एवं पुनर्वास निदेशक नितिका खंडेलवाल ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रभारी अधिकारी पुनर्वास को संबंधित पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
अब देखना यह है कि दो दशक से अधिक समय से लंबित इस मामले में प्रभावित परिवारों की पात्रता कब तय होती है और उन्हें पुनर्वास का लाभ कब तक मिल पाता है। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि डीएम के निर्देश के बाद लंबित प्रकरण का निस्तारण होगा और उन्हें उनका वैधानिक हक मिल सकेगा।

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