अब कबाड़ नहीं, बल्कि कमाई का प्रमुख स्रोत है चीड़ की पत्तियां: डीएम

Mar 27, 2026 - 00:44
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अब कबाड़ नहीं, बल्कि कमाई का प्रमुख स्रोत है चीड़ की पत्तियां: डीएम
अब कबाड़ नहीं, बल्कि कमाई का प्रमुख स्रोत है चीड़ की पत्तियां: डीएम

अब कबाड़ नहीं, बल्कि कमाई का प्रमुख स्रोत है चीड़ की पत्तियां: डीएम

पिरुल ब्रिकेट से होटल संचालकों को मिल सकती है बड़ी राहत, डीएम और सीडीओ ने चकोन प्लांट का किया दौरा

कम शब्दों में कहें तो, उत्तरकाशी जनपद में चीड़ की पत्तियों को अब कबाड़ नहीं, बल्कि आय का स्रोत बनाने की कोशिश की जा रही है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य और मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह ने हाल ही में डुण्डा विकास खण्ड के ग्राम चकोन में एक पिरुल आधारित विद्युत परियोजना का निरीक्षण किया।

यह परियोजना 25 किलोवाट की क्षमता से संचालित होती है और इसका मुख्य उद्देश्य स्वरोजगार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। इस दौरान, जिलाधिकारी ने प्लांट में पिरुल से तैयार होने वाले ब्रिकेट और पैलेट (ईंधन) की गुणवत्ता का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने इस तथ्य को स्पष्ट किया कि पिरुल सिर्फ वनों के लिए खतरा नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।

पिरुल का व्यावसायिक उपयोग

जिलाधिकारी ने जोर देते हुए कहा कि पिरुल से तैयार उत्पाद स्थानीय होटल व्यवसायियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होंगे। उन्होंने बताया कि आगामी चारधाम यात्रा के दौरान, पिरुल ब्रिकेट और पैलेट का उपयोग, जो कि एलपीजी गैस की तुलना में सस्ता और अधिक पर्यावरण के अनुकूल है, महत्वपूर्ण साबित होगा।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस ईंधन का प्रचार-प्रसार करें ताकि इसका उपयोग बढ़ सके और वनाग्नि की घटनाओं में कमी आए।

आर्थिक लाभ

इस प्लांट के माध्यम से जो बिजली उत्पादित होती है, उसे यूपीसीएल को 7 रुपये 54 पैसे प्रति यूनिट की दर से बेचा जा रहा था। इस परियोजना के संचालक ने बताया कि पिरुल आधारित ईंधन गांवों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रहा है, क्योंकि यह बहुत सस्ती दर पर उपलब्ध है।

परियोजना का महत्व

इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी डीपी बलूनी, पिरुल प्लांट प्रबंधक महादेव सिंह गंगाडी, राजकुमार गंगाडी और अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करती है।

इस प्रकार, चीड़ की पत्तियां अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धारा में महत्वपूर्ण रूप से योगदान कर रही हैं।

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टीम अमृता बाजारपत्रिका, सुषमा रानी

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