ऋषिकेश AIIMS में 8 करोड़ का घोटाला: CBI ने पूर्व निदेशक समेत तीन पर दर्ज किया मुकदमा

Sep 30, 2025 - 07:44
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ऋषिकेश AIIMS में 8 करोड़ का घोटाला: CBI ने पूर्व निदेशक समेत तीन पर दर्ज किया मुकदमा
ऋषिकेश AIIMS में 8 करोड़ का घोटाला: CBI ने पूर्व निदेशक समेत तीन पर दर्ज किया मुकदमा

ऋषिकेश AIIMS में 8 करोड़ का घोटाला: CBI ने पूर्व निदेशक समेत तीन पर दर्ज किया मुकदमा

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कम शब्दों में कहें तो, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश में 8 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के बाद सीबीआई ने पूर्व निदेशक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

नई दिल्ली/ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश में करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया है। सूचना मिली है कि कार्डियोलॉजी विभाग में 16 बेड की कोरोनरी केयर यूनिट (CCU) बनाने तथा उपकरण लगाने के नाम पर 8 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, लेकिन यह यूनिट एक दिन भी नहीं चल पाई। ऐसी स्थिति में जांच में कई अनियमितताओं का पता लगाया गया है।

घोटाले की चौंकाने वाली जानकारी

जांच में खुलासा हुआ है कि उपकरणों की आपूर्ति में कई कमी रही, जो उपयोग में लाए गए थे वे घटिया गुणवत्ता के थे और कुछ सामान तो पूरी तरह गायब पाए गए। खास बात यह है कि इस मामले से जुड़ी टेंडर फाइल भी गायब हो गई है, जो इस घोटाले को और भी संदिग्ध बनाती है।

2017 से शुरू हुआ मामला

यह घोटाला 2017 का है, जब दिल्ली की कंपनी एमएस प्रो मेडिक डिवाइसेस को ठेका दिया गया था। 2019-20 में कंपनी द्वारा दो किस्तों में उपकरण भेजे भी गए, और AIIMS ने 8.08 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया, लेकिन सीसीयू कभी चालू नहीं हो सका। बीते 26 मार्च को सीबीआई और एआईएमएस के अधिकारियों द्वारा की गई संयुक्त जांच में इन अनियमितताओं की पुष्टि हुई।

सीबीआई की कार्रवाई

शुरुआती जांच के बाद, 26 सितंबर को सीबीआई एसीबी देहरादून ने पूर्व निदेशक डॉ. रविकांत, पूर्व खरीद अधिकारी डॉ. राजेश पसरीचा, पूर्व स्टोर कीपर रूपसिंह और अन्य अज्ञात सरकारी एवं निजी व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई उन सब पर आरोपों के आधार पर हुई है जो इस घोटाले से जुड़े हुए थे।

यह मामला दर्शाता है कि किस प्रकार से सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा सकता है, और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। समाज को यह जानने का अधिकार है कि उनके रुपये किस प्रकार खर्च किए जा रहे हैं।

इस घोटाले की जांच में सीबीआई की अत्यधिक सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसी अनियमितताओं की ओर गंभीरता से देख रही है। लोगों की आशा है कि इस मामले में शीघ्र और न्यायसंगत कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में सरकारी संस्थानों में ऐसे घोटालों पर पूरी तरह से रोक लग सके।

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टीम अमृता बाजार पत्रिका, प्रियंका सिंह

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