टिहरी मेडिकल कालेज विवाद: सीएम दरबार में उठी गंभीर चर्चा की कहानी
टिहरी मेडिकल कालेज विवाद: सीएम दरबार में उठी गंभीर चर्चा की कहानी
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कम शब्दों में कहें तो टिहरी मेडिकल कालेज विवाद अब मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है, जहां स्वास्थ्य मंत्री और विधायक के बीच गंभीर वार्ता हुई।
देहरादून। टिहरी मेडिकल कालेज मामले ने एक और मोड़ ले लिया है, जब मुख्यमंत्री धामी ने इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल और भाजपा विधायक किशोर उपाध्याय को अपने सरकारी आवास पर बुलाया। यह विवाद ऐसे समय में उठ खड़ा हुआ है, जब प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
मशहूर शायर शेर बशीर बद्र का एक प्रसिद्ध शेर यहाँ बिल्कुल फिट बैठता है:
“दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों।”
यह पंक्ति टिहरी के कांग्रसी नेताओं किशोर और सुबोध के बीच चल रहे विवाद को बखूबी चित्रित करती है। दोनों ही नेता अब भाजपा में हैं, लेकिन उनकी पुरानी प्रतिद्वंद्विता कोई नई बात नहीं है।
जब टिहरी मेडिकल कॉलेज विवाद सड़क पर भी हंगामा खड़ा करने लगा, तब मुख्यमंत्री ने दोनों नेताओं के बीच संबंधों को सुधारने की चेष्टा की। हाल ही में, किशोर ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया था कि वे मेडिकल कालेज को अन्यत्र शिफ्ट करना चाहते हैं। इस आरोप के चलते स्थिति और भी गंभीर हो गई, जिसके चलते जनता का आक्रोश बढ़ता गया।
अपनी बात रखते हुए, मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मेडिकल कालेज की स्थापना पर जनता की भावनाओं का berücksichtigt किया जाएगा। यह बैठक इस दृष्टि से महत्वपूर्ण थी कि इसमें टिहरी के स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई।
सीएम ने कहा, “टिहरी जैसे महत्वपूर्ण प्रदेश में एक उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान की आवश्यकता है, ताकि यहाँ की जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।” उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण का कार्य सरकार की प्राथमिकताओं में है।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने भी इस बैठक में स्वास्थ्य आवश्यकताओं की जानकारी दी और विधायक किशोर उपाध्याय ने जनता को बताने का कार्य किया कि मेडिकल कालेज की स्थापना क्षेत्र के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।
सीएम धामी ने सुझाव दिया कि प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को और भी मजबूत और सक्षम बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसका मतलब है कि सरकार अधिक से अधिक चिकित्सा संस्थान की स्थापना और स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वचनबद्ध है।
शनिवार को हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि मेडिकल कालेज को स्थानांतरण की योजना पर विराम लग जाएगा। लेकिन दूसरी तरफ, यह विवाद चुनावी वर्ष में भाजपा के लिए भी एक चुनौती साबित हो सकता है, क्योंकि विधायक किशोर उपाध्याय ने स्वास्थ्य मंत्री को सीधे तौर पर धमकी दी है, जिससे विपक्ष को एक मजबूत तीर मिल गया है।
इस विवाद को लेकर लग रहे तर्क-वितर्क से साफ है कि टिहरी मेडिकल कॉलेज का मामला केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के संवर्धन का प्रश्न भी है। पिता के नाम से चल रही इस राजनीतिक कथानक में अब कितना बदलाव आता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
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Team Amrita Bazaar Patrika - Priya Sharma
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