टीईटी अनिवार्यता का समाधान निकालेगा शिक्षा मंत्री, अधिकारियों को दिए निर्देश
टीईटी अनिवार्यता का समाधान निकालेगा शिक्षा मंत्री, अधिकारियों को दिए निर्देश
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कम शब्दों में कहें तो, प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने टीईटी की अनिवार्यता से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए निर्देश दिए हैं, जिससे सभी कार्यरत शिक्षकों को राहत मिलेगी।
देहरादून। उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने हाल ही में कहा है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से संबंधित समस्याओं का शीघ्र समाधान निकाला जाएगा। इस दिशा में, उन्होंने विभागीय अधिकारियों को शिक्षक संगठनों के साथ सकारात्मक संवाद करने और एक सुसंगत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है।
टीईटी की अनिवार्यता पर महत्वपूर्ण चर्चा
शिक्षा निदेशालय में आयोजित समीक्षा बैठक में, डॉ. रावत ने यह कहा कि राज्य में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले लगभग 20,000 शिक्षकों की इस महत्वपूर्ण समस्या पर सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए गंभीरता से विचार किया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने अन्य राज्यों में टीईटी से संबंधित अपनाए गए मॉडल और निर्णयों का अध्ययन करने और उनकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा। यह कदम राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने में सहायक होगा।
शिक्षकों की पदोन्नति में तेजी लाने के निर्देश
बैठक के दौरान, मंत्री ने शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की। उन्होंने उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए, ताकि शिक्षकों को जल्द से जल्द पदोन्नति का लाभ मिल सके। यह कदम राज्य के शिक्षकों के लिए एक सकारात्मक बदलाव लाने वाला हो सकता है।
सामाजिक समावेशिता और साक्षरता की दिशा में कार्य
डॉ. रावत ने आगामी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) रैंकिंग में उत्तराखंड की स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए अभी से तैयारी शुरू करने की बात कही। इसके लिए, उन्होंने लर्निंग आउटकम, शिक्षक प्रशिक्षण और अन्य मानकों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, प्रत्येक विद्यार्थी की कम से कम तीन गतिविधियों में सहभागिता सुनिश्चित करने, राज्य को शत-प्रतिशत साक्षरता की दिशा में आगे बढ़ाने और 30 जून तक सभी स्तरों पर अटैचमेंट समाप्त करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह सभी प्रयास न केवल शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करेंगे, बल्कि यह सुनिश्चित करेंगे कि शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को बेहतर अवसर मिले। शिक्षा मंत्री के इस दृष्टिकोण से यह स्पष्ट है कि वे शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जारी इस पहल के पीछे केवल एक ही उद्देश्य है - कि सभी छात्र उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त करें और कार्यरत शिक्षकों को उनके संघर्षों का उचित सम्मान मिले। इस दिशा में यदि सकारात्मक कदम उठाए गए तो निश्चित रूप से उत्तराखंड की शिक्षा प्रणाली में पर्याप्त बदलाव आएगा।
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टीम अमृता बाजार पत्रिका, सुनंदा कौर
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